नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने कहा है कि राष्ट्रीय हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र बनाए रखने के राष्ट्रीय मिशन (एनएमएसएचई) से संबंधित समीक्षा बैठक के विवरण और विस्तृत परियोजना रिपोर्टों को आरटीआई अधिनियम के तहत उपलब्ध कराने से रोका जा सकता है।
सीआईसी ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा इस तरह की जानकारी को रणनीतिक, वैज्ञानिक और बौद्धिक संपदा संबंधी चिंताओं के आधार पर देने से इनकार करने के फैसले को बरकरार रखा है।
अपनी दलीलों में, डीएसटी ने कहा कि एनएमएसएचई ‘‘कई मुख्य मिशन में से एक’’ है जिसे यह राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (एनएपीसीसी) के तहत लागू करता है।
डीएसटी ने कहा कि एनएपीसीसी एक राष्ट्रीय नीति ढांचा है जिसकी ‘‘सर्वोच्च प्राधिकरण, जलवायु परिवर्तन पर प्रधानमंत्री की परिषद (पीएमसीसीसी) द्वारा समीक्षा की जाती है, जिसकी अध्यक्षता भारत के प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है।’’
विभाग ने आयोग को बताया कि एनएमएसएचई हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए जलवायु परिवर्तन विज्ञान और अनुकूलन से संबंधित अनुसंधान एवं विकास पहलों का समर्थन करता है, जो न केवल अनुसंधान के दृष्टिकोण से बल्कि भारत के रणनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण हैं।
आवेदक पक्ष ने सुनवाई के दौरान यह दलील दी कि मांगी गई जानकारी प्रदान नहीं की गई थी और यह शैक्षिक शोध के लिए आवश्यक थी।
सीआईसी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि विभाग ने आरटीआई प्रश्नों का पर्याप्त तरीके से समाधान किया था और ‘‘मौजूदा परिस्थितियों में, आरटीआई अधिनियम के तहत आयोग का हस्तक्षेप आवश्यक नहीं है।’’
भाषा शफीक देवेंद्र
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