नयी दिल्ली, आठ अप्रैल (भाषा) भारत में 2021 में गर्मी के कारण अनुमानित 160 अरब श्रम घंटे का नुकसान हुआ, जिसकी लागत देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 5.4 प्रतिशत के बराबर है। एक नयी रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अत्यधिक गर्मी के कारण हृदय संबंधी बीमारियों से मौत का खतरा 11.7 प्रतिशत बढ़ जाता है, जो भारत में चिंता का विषय है, जहां कुल मौतों में हृदय रोगों से होने वाली मौतों की हिस्सेदारी लगभग 28 से 30 प्रतिशत है।
जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन बढ़ाने की दिशा में काम करने वाले एक सहयोगी मंच ‘क्लाइमेटराइज एलायंस’ ने रणनीतिक परोपकारी सहायता संगठन ‘दासरा’ के सहयोग से बुधवार को ‘अंडर द वेदर : इंडियाज क्लाइमेट-हेल्थ इंटरसेक्शंस एंड पाथवेज टू रेजिलिएंस’ नामक रिपोर्ट जारी की।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती गर्मी माताओं के स्वास्थ्य के लिए भी चिंता का विषय है।
इसमें कहा गया है, “पिछले पांच वर्षों में भारत में गर्भवती महिलाओं को औसतन हर साल छह अतिरिक्त दिन खतरनाक रूप से उच्च तापमान का सामना करना पड़ा। अतिरिक्त गर्मी का संबंध समय से पहले प्रसव की संभावना में 16 प्रतिशत की वृद्धि के साथ-साथ मृत शिशु के जन्म और नवजात के अस्पताल में भर्ती होने के अधिक खतरे से भी है।”
रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि जलवायु परिवर्तन उन लोगों को असमान रूप से प्रभावित करता है, जो पहले से ही कमजोर हैं, जिनमें महिलाएं, बच्चे, असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, ग्रामीण समुदाय और स्वास्थ्य सेवा तक कमजोर पहुंच वाले लोग शामिल हैं।
इसमें कहा गया है, “इस लिहाज से जलवायु परिवर्तन नये संकट पैदा करने के बजाय मौजूदा खतरों को और गंभीर बनाने वाले कारक की तरह काम करता है।”
भाषा तान्या पारुल
पारुल