मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री शिवकुमार दिल्ली रवाना

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मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री शिवकुमार दिल्ली रवाना

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  • Publish Date - July 21, 2026 / 09:58 AM IST,
    Updated On - July 21, 2026 / 09:58 AM IST

(फाइल फोटो के साथ)

बेंगलुरु, 21 जुलाई (भाषा) कर्नाटक में बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अटकलों के बीच मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार मंगलवार को कांग्रेस आलाकमान से चर्चा के लिए नयी दिल्ली रवाना हुए।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद के भी इन चर्चाओं में शामिल होने की संभावना है।

मीडिया के साथ साझा किए गए मुख्यमंत्री के यात्रा कार्यक्रम के अनुसार, वह मंगलवार सुबह राष्ट्रीय राजधानी पहुंचेंगे और केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करेंगे। उनकी वापसी की यात्रा का कोई कार्यक्रम तय नहीं है।

उनके यात्रा कार्यक्रम में कांग्रेस आलाकमान के साथ बैठक का कोई जिक्र नहीं है लेकिन पार्टी सूत्रों ने कहा है कि वह पार्टी नेतृत्व के साथ बातचीत करेंगे।

शिवकुमार ने सोमवार को एक कार्यक्रम में कहा, ‘‘सिद्धरमैया और मैं दिल्ली जा रहे हैं। मंत्रिमंडल का विस्तार होना है, इसमें पहले ही देर हो चुकी है…।’’

शिवकुमार, सिद्धरमैया और हरिप्रसाद पिछले हफ्ते दिल्ली गए थे और उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल और कर्नाटक के प्रभारी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला के साथ चर्चा की थी।

पिछले हफ्ते शिवकुमार की यात्रा के दौरान एआईसीसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को निजी कारणों से बेंगलुरु आना पड़ा था इसलिए शिवकुमार ने बाद में शनिवार को बेंगलुरु में खरगे से चर्चा की।

यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब मंत्री बनने के इच्छुक लोग मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए जोर-शोर से लामबंदी कर रहे हैं। सिद्धरमैया के 28 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद तीन जून को शिवकुमार ने 13 मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

कर्नाटक मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री समेत कुल 34 पद हैं, जिनमें से 20 पद अब भी खाली हैं और शिवकुमार पर अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने का दबाव बढ़ रहा है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, मंत्री बनने के कई दावेदारों और सीमित पदों के कारण डी.के. शिवकुमार के सामने संतुलन बनाए रखने की चुनौती है। मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने वाले नेताओं में बड़े पैमाने पर असंतोष पैदा होने की आशंका है।

भाषा सुरभि शफीक

शफीक