चुनावी प्रक्रिया नष्ट करने के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त को ‘’जेल भेजना चाहिए’’: तृणमूल सांसद

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चुनावी प्रक्रिया नष्ट करने के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त को ‘’जेल भेजना चाहिए’’: तृणमूल सांसद

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  • Publish Date - February 25, 2026 / 07:54 PM IST,
    Updated On - February 25, 2026 / 07:54 PM IST

नयी दिल्ली, 25 फरवरी (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद साकेत गोखले ने पश्चिम बंगाल में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में कई अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए बुधवार को कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को ‘‘जेल भेजा जाना चाहिए।’’

गोखले ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि आठ महीने में पूरा होने वाली विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को तीन महीने में ही पूरा कर लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘1.67 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने’ के लिए एक ‘रहस्यमय’ सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि ‘भाजपा समर्थक अधिकारियों’ को ‘माइक्रो-पर्यवेक्षक’ नियुक्त किया गया था।

गोखले ने आरोप लगाया, ‘‘कमजोर निर्वाचन आयोग (ईसीआई) और ज्ञानेश कुमार के कारण, 80 लाख वैध मतदाताओं की सुनवाई केवल तीन दिनों में पूरी करनी पड़ी क्योंकि सॉफ्टवेयर का उपयोग कर उन्हें ‘तार्किक विसंगतियों’ की श्रेणी के तहत चिह्नित किया गया था। आज, बंगाल में 80 लाख मतदाताओं पर केवल ईसीआई की हेराफेरी और धोखाधड़ी के कारण मतदाता सूची से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है।’’

गोखले ने कहा, ‘‘इसीलिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भाजपा की मदद कर भारत की चुनावी प्रक्रिया को नष्ट करने के आरोप में जेल भेजा जाना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि ‘कमजोर भारतीय निर्वाचन आयोग’ ने बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को पूरी तरह से बिगाड़ दिया।

गोखले ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं का मिलान 2002 की मतदाता सूची से करने के लिए एक रहस्यमय सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि इस सॉफ्टवेयर ने एआई का उपयोग करके सूची को बांग्ला से अंग्रेजी में रूपांतरित किया, जिसके परिणामस्वरूप नामों का गलत अनुवाद हुआ।

उन्होंने कहा, ‘‘जिन लोगों के अंग्रेजी नाम 2002 की सूची से एआई द्वारा अनुवादित नामों की वर्तनी से मेल नहीं खाते थे, उन्हें ‘तार्किक विसंगति’ के रूप में चिह्नित किया गया और सुनवाई के लिए नोटिस जारी किए गए।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि इसी कारण 1.67 करोड़ मतदाताओं को ‘तार्किक विसंगति’ की श्रेणी के तहत चिह्नित किया गया। निर्वाचन आयोग ने 95 लाख मतदाताओं को सुनवाई के लिए नोटिस जारी किए।

टीएमसी सांसद ने कहा कि ‘माइक्रो पर्यवेक्षकों’ को निर्वाचन आयोग के सॉफ्टवेयर में बदलाव करके मतदाताओं को हटाने की शक्ति ‘अवैध रूप से’ दी गई थी।

भाषा संतोष अविनाश

अविनाश