नयी दिल्ली, 30 सितंबर (भाषा) देश के शीर्ष रक्षा नेतृत्व ने नौसैन्य कमांडरों से नौसेना में उच्च स्तर की युद्धक तैयारी बनाए रखने और समुद्री निगरानी को मजबूत करने का आग्रह किया है। साथ ही पश्चिम एशिया में मौजूदा स्थिति के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में नौसेना की भूमिका को रेखांकित किया गया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल एन एस राजा सुब्रमणि, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने यहां नौसेना भवन में 29 सितंबर से एक अक्टूबर तक आयोजित किए जा रहे नौसेना के कमांडरों के दूसरे सम्मेलन के सत्रों को संबोधित किया।
नौसेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि अपने संबोधन में सिंह ने समुद्री क्षेत्र में भारत की ‘बढ़ती रणनीतिक जिम्मेदारियों’ और हिंद महासागर क्षेत्र में प्रथम प्रतिक्रिया देने वाली तथा ‘पसंदीदा सुरक्षा साझेदार’ के रूप में नौसेना की भूमिका को रेखांकित किया।
उन्होंने समुद्री निगरानी, विश्लेषणात्मक क्षमता और अभियानगत प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
पश्चिम एशिया की स्थिति का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने भारतीय नौसेना के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ और भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में इसके योगदान को रेखांकित किया।
उन्होंने ‘‘आत्मनिर्भरता’’, स्वदेशी क्षमता विकास और प्रौद्योगिकी के समावेशन पर भी जोर दिया तथा कहा कि ‘‘सुरक्षित समुद्र का होना किसी भी सुरक्षित राष्ट्र और विकसित राष्ट्र की आधारभूत आवश्यकता है।’’
सीडीएस ने भारतीय नौसेना को एक ‘रणनीतिक बल गुणक’ के रूप में मान्यता दी और आधुनिक युद्ध में प्रौद्योगिकी परिवर्तन, आंकड़ों के आदान-प्रदान तथा लचीलेपन पर जोर दिया।
तीन दिवसीय यह सम्मेलन भारतीय नौसेना के वरिष्ठ नेतृत्व को एक मंच पर लाता है, जिसमें विभिन्न अभियानों के कमांडर और क्षेत्र कमांडर शामिल होते हैं।
इसमें अभियानगत तैयारी, समुद्री सुरक्षा और भविष्य की क्षमताओं के विकास से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
अधिकारी ने बताया कि सम्मेलन की शुरुआत नौसेना प्रमुख के उद्घाटन संबोधन के साथ हुई, जिसमें उन्होंने मौजूदा समुद्री सुरक्षा माहौल और भारतीय नौसेना की अभियानगत स्थिति की समीक्षा की।
एडमिरल स्वामीनाथन ने समुद्री क्षेत्र में मौजूदा और उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए प्रौद्योगिकी के समावेशन और क्षमता विकास में तेजी लाने के साथ-साथ ‘उच्च स्तर की युद्धक तैयारी, फुर्ती और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता’ बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
जनरल सुब्रमणि ने प्रौद्योगिकी के समावेशन, ‘आत्मनिर्भरता’ और भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में नौसेना के निरंतर प्रयासों की सराहना की।
जनरल सेठ ने भी नौसेना कमांडरों के साथ बातचीत की और मौजूदा सुरक्षा माहौल पर अपने विचार साझा किए।
भाषा संतोष वैभव
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