जम्मू, 11 अगस्त (भाषा) जनसांख्यिकीय बदलावों की जांच कर रही सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति ने मंगलवार को जगती टाउनशिप का दौरा किया, ताकि आबादी के विभिन्न वर्ग से विचार और सुझाव एकत्र किए जा सकें। विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए बनाया गया यह सबसे बड़ा आवासीय क्षेत्र है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि टीम ने जम्मू के नरवाल इलाके में रोहिंग्या प्रवासियों की बस्ती का भी निरीक्षण किया और कई प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की। इनमें गोरखा समुदाय के प्रतिनिधि और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) से आए शरणार्थियों के प्रतिनिधि शामिल थे।
उच्चस्तरीय समिति के चार सदस्य सोमवार को तीन दिवसीय दौरे पर जम्मू पहुंचे और उन्होंने मुख्य सचिव अटल डुल्लू तथा पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नलिन प्रभात समेत वरिष्ठ सरकारी और पुलिस अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया।
केंद्र सरकार ने मई में सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नावलेकर की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। इसका उद्देश्य अवैध आव्रजन और अन्य असामान्य कारणों से होने वाले जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करना तथा इन बदलावों से निपटने के उपाय सुझाना है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले साल 15 अगस्त को उच्चाधिकार प्राप्त जनसांख्यिकीय मिशन की घोषणा की थी, जिसे 11 सितंबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंज़ूरी दी थी।
दौरे के दूसरे दिन जनगणना आयुक्त मृत्यंजय कुमार के साथ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से सेवानिवृत्त अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) से सेवानिवृत्त अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और शमिका रवि की टीम नगरोटा स्थित जगती टाउनशिप पहुंची। वहां विस्थापित पंडितों के एक समूह ने टीम का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। इसके बाद टीम ने उनके प्रतिनिधियों के साथ करीब एक घंटे तक बंद कमरे में बैठक की।
समिति के साथ मौजूद राहत एवं पुनर्वास आयुक्त (प्रवासी) डॉ. अरविंद करवानी ने कहा कि समिति के विचारार्थ विषयों के अनुसार, वह जनसांख्यिकीय बदलावों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए अधिकारियों के साथ-साथ विभिन्न जनप्रतिनिधिमंडलों से भी मुलाकात कर रही है।
भाषा आशीष दिलीप
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