प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों को हटाने संबंधी विधेयकों पर विपक्ष शासित राज्यों से विचार मांगेगी समिति

Ads

प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों को हटाने संबंधी विधेयकों पर विपक्ष शासित राज्यों से विचार मांगेगी समिति

  •  
  • Publish Date - February 25, 2026 / 07:35 PM IST,
    Updated On - February 25, 2026 / 07:35 PM IST

नयी दिल्ली, 25 फरवरी (भाषा) भ्रष्टाचार के मामलों में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को पद से हटाने के प्रावधान वाले विधेयकों पर विचार कर रही संसदीय समिति कर्नाटक और तेलंगाना जैसे विपक्ष शासित राज्यों से उनके विचार मांगेगी।

भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली समिति ने बुधवार को मध्य प्रदेश के विचारों को सुना, जिसने ‘संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025’ का पूरी तरह से समर्थन किया।

मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव ने राज्य का प्रतिनिधित्व किया और उन्होंने समिति के समक्ष कहा कि राज्य विधेयक के प्रावधानों से ‘‘पूरी तरह सहमत’’ है।

‘पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च’ और ‘इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट’ के प्रतिनिधि भी संसदीय समिति के सामने पेश हुए और समझा जाता है कि उन्होंने समिति को कुछ सुझाव दिए हैं।

सूत्रों ने बताया कि समिति ने दो कानूनी अनुसंधान संगठनों के विचारों को सुना, जिन्होंने कहा कि वे प्रस्तावित कानून के प्रावधानों से पूरी तरह सहमत नहीं हैं और संशोधन का सुझाव दिया। हालांकि, उन्होंने समिति से कहा कि विधेयकों को लेकर भारत सरकार की मंशा सवालों के घेरे में नहीं है।

सूत्रों ने कहा कि समिति के सदस्य विपक्ष शासित राज्यों के विचार जानने के लिए सर्वसम्मति से सहमत हुए और कर्नाटक एवं तेलंगाना को बुलाने पर सहमत हुए।

समिति ने यह भी कहा कि वह विपक्षी दलों द्वारा शासित केरल और पश्चिम बंगाल को इस मामले पर अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित करना चाहती है।

इन राज्यों को बाद में आमंत्रित किया जाएगा क्योंकि अगले कुछ हफ्तों में राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं।

समिति की बैठक बुधवार को लगभग तीन घंटे तक चली, जिसमें प्रत्येक प्रतिनिधि को अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए एक घंटे का समय दिया गया।

समिति की अध्यक्ष सारंगी ने कहा कि यह समिति की छठी बैठक है और अगली बैठक 10 मार्च को बुलाई जाएगी।

अब तक हुई छह बैठकों में 14 संगठन और दो राज्य, समिति के समक्ष पेश हो चुके हैं।

इससे पहले, राजस्थान राज्य अपने मुख्य सचिव के माध्यम से समिति के सामने पेश हुआ और प्रस्तावित कानून के प्रमुख प्रावधानों का समर्थन करते हुए अपने विचार रखे।

भाषा हक हक अविनाश

अविनाश