केन-बेतवा परियोजना से संबंधित ‘बेदखली’ की शिकायतें मध्य प्रदेश सरकार को भेजी गईं: केंद्र

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केन-बेतवा परियोजना से संबंधित ‘बेदखली’ की शिकायतें मध्य प्रदेश सरकार को भेजी गईं: केंद्र

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  • Publish Date - August 6, 2026 / 10:14 PM IST,
    Updated On - August 6, 2026 / 10:14 PM IST

नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को संसद को बताया कि उसे मध्य प्रदेश में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के कारण लोगों के विस्थापन के संबंध में कई आवेदन मिले हैं, जिन्हें जांच और कार्रवाई के लिए राज्य सरकार और संबंधित जिलों के प्रशासन को भेजा गया है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के सांसद अजेंद्र सिंह लोधी ने इस परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों के पुनर्वास, वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के पालन और लोगों को कथित तौर पर बेदखल किए जाने के बारे में सवाल पूछे थे।

केंद्रीय मंत्रालय ने उनके सवालों के लिखित जवाब में कहा कि उन्हें ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है जिसमें खास तौर पर यह आरोप लगाया गया हो कि दिया गया मुआवजा लाभार्थियों तक नहीं पहुंचा।

हालांकि, मंत्रालय ने कहा कि उसे इस परियोजना की वजह से ‘‘विस्थापन से जुड़े मुद्दों’’ के बारे में शिकायतें मिली हैं। लेकिन, एफआरए को लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन का है।

केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने अपने जवाब में कहा, ‘‘इन्हें जांच और जरूरी कार्रवाई के लिए मध्य प्रदेश राज्य सरकार और संबंधित जिलों के प्रशासन को भेज दिया गया है।’’

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों और अन्य निवासियों का विस्थापन, पुनर्वास और बसावट के मुद्दों को लेकर लंबे समय से आंदोलन चल रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने जुलाई में कई सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किए जिनमें ‘‘जल सत्याग्रह’’, ‘‘चिता सत्याग्रह’’ और ‘‘फांसी सत्याग्रह’’ शामिल हैं।

इस विरोध-प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठे, जिन्हें बाद में राज्य पुलिस ने जबरदस्ती वहां से हटा दिया। लगभग 150 ग्रामीणों को भी वहां से हटाया गया। इस घटना ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा।

अपने जवाब में, जनजातीय कार्य मंत्रालय ने कहा कि परियोजना से प्रभावित अनुसूचित जनजाति (एसटी) के परिवारों के पुनर्वास की योजना, 2016 में राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी द्वारा सौंपे गए प्रस्ताव पर आधारित थी।

वर्ष 2016 के एक अनुमान का हवाला देते हुए, मंत्रालय ने कहा कि परियोजना के पहले चरण में 1,913 परिवार (जिनमें 8,339 लोग शामिल हैं) विस्थापित होंगे। इनमें अनुसूचित जनजाति के 648 परिवार भी शामिल हैं।

भाषा सुभाष अविनाश

अविनाश