एफसीआरए नवीनीकरण संबंधी सूचना देने से पूरी तरह इनकार करना निराधार प्रतीत होता है: सीआईसी
एफसीआरए नवीनीकरण संबंधी सूचना देने से पूरी तरह इनकार करना निराधार प्रतीत होता है: सीआईसी
नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने कहा है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के तहत पंजीकरण के नवीनीकरण संबंधी आवेदनों की जानकारी देने से पूरी तरह इनकार करना ‘‘अनुचित और निराधार प्रतीत होता है।’’
आयोग ने यह भी कहा कि केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) ने शिकायतकर्ता के सूचना के अधिकार को प्रथम दृष्टया ‘‘बाधित किया।’’
विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम भारत में व्यक्तियों और संगठनों द्वारा विदेशी अंशदान स्वीकार करने और उसके उपयोग को नियंत्रित करता है। गृह मंत्रालय इस कानून को लागू करता है और अधिनियम एवं संबंधित नियमों का पालन करने वाले पात्र संगठनों को विदेशी धन प्राप्त करने के लिए पंजीकरण प्रदान करता है या उसका नवीनीकरण करता है।
मुख्य सूचना आयुक्त राज कुमार गोयल ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत दायर एक आवेदन का जवाब नहीं मिलने को लेकर गृह मंत्रालय के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी के खिलाफ की गई शिकायत पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं।
आवेदक ने एक जनवरी 2022 से एफसीआरए पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए आवेदन करने वाले संगठनों, नवीनीकरण की मंजूरी पाने वाले आवेदनों और लंबित आवेदनों के बारे में जानकारी मांगी थी। उसने लंबित आवेदनों में देरी के कारण और एफसीआरए प्रभाग द्वारा उठाई गई आपत्तियों का समाधान होने के बाद नवीनीकरण मंजूर करने से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) या अन्य जानकारी भी मांगी थी।
आरटीआई आवेदन 16 अक्टूबर 2024 को दायर किया गया था। आवेदक ने सीपीआईओ पर उसके आवेदन का जवाब नहीं देने का आरोप लगाते हुए पांच दिसंबर 2024 को केंद्रीय सूचना आयोग का रुख किया।
गृह मंत्रालय ने आयोग को बताया कि बाद में 24 दिसंबर 2024 को जवाब भेज दिया गया था।
केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी ने अपने जवाब में कहा था कि मांगी गई सूचना आरटीआई कानून की धारा 8(1)(जे) के तहत छूट के दायरे में आती है। यह धारा निजी जानकारी से संबंधित है। अधिकारी ने आवेदक को किसी विशेष आवेदन से जुड़ी जानकारी के लिए एफसीआरए के ऑनलाइन पोर्टल पर जाने की सलाह दी थी।
हालांकि, केंद्रीय सूचना आयोग ने कहा कि केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी आरटीआई कानून के अनुरूप प्रत्येक बिंदु का उचित जवाब देने में विफल रहे और उन्होंने धारा 8(1)(जे) का ‘‘यांत्रिक तरीके से’’ इस्तेमाल किया।
आयोग ने कहा, ‘‘तथ्य यह है कि केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी ने आरटीआई कानून में निर्धारित समयसीमा के भीतर आवेदन का जवाब नहीं देकर शिकायतकर्ता के सूचना के अधिकार को प्रथम दृष्टया बाधित किया।’’
आयोग ने कहा कि आरटीआई कानून की धारा 8(1)(जे) के तहत पूरी सूचना को छूट के दायरे में मानना ‘‘अनुचित और निराधार प्रतीत होता है।’’
उसने यह भी कहा कि सीपीआईओ द्वारा जानकारी देने से पूरी तरह इनकार करने के कारण शिकायतकर्ता के सूचना के अधिकार में ‘‘और बाधा’’ उत्पन्न हुई।
आयोग ने केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी को लिखित जवाब देकर यह बताने का निर्देश दिया कि आरटीआई कानून की धारा 7(1) में निर्धारित अवधि के भीतर आवेदन का जवाब क्यों नहीं दिया गया।
अधिकारी को यह भी स्पष्ट करने को कहा गया कि शिकायतकर्ता के सूचना के अधिकार में और बाधा डालते हुए पूरी जानकारी देने से इनकार क्यों किया गया।
केंद्रीय सूचना आयोग की पंजीयक शाखा को आरटीआई कानून की धारा 20 के तहत ‘कारण बताओ नोटिस’ पर सुनवाई निर्धारित करने का भी निर्देश दिया गया है।
भाषा सिम्मी सुरेश
सुरेश

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