डूसू चुनाव में सभी चार सीट पर जीत का भरोसा : एबीवीपी

डूसू चुनाव में सभी चार सीट पर जीत का भरोसा : एबीवीपी

डूसू चुनाव में सभी चार सीट पर जीत का भरोसा : एबीवीपी
Modified Date: September 17, 2026 / 09:57 pm IST
Published Date: September 17, 2026 9:57 pm IST

नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने बृहस्पतिवार को भरोसा जताया कि वह दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू चुनाव) में केंद्रीय पैनल के सभी चार पदों पर जीत हासिल करेगी। छात्र संगठन ने अपने कार्यकर्ताओं पर कथित हमले में शामिल लोगों की गिरफ्तारी की मांग भी की।

एबीवीपी के राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने डूसू चुनाव के लिए मतदान से एक दिन पहले संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि संगठन को 18 सितंबर को होने वाले चुनावों में “4-0” से जीत हासिल होने की उम्मीद है।

एबीवीपी ने अध्यक्ष पद के लिए यश डबास, उपाध्यक्ष पद के लिए ईशू मौर्य, सचिव पद के लिए रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद के लिए लक्ष्यराज सिंह को मैदान में उतारा है।

सोलंकी ने कहा कि एबीवीपी के उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं ने पूरे प्रचार अभियान के दौरान छात्रों से बातचीत की और उनसे जुड़े मुद्दों के समाधान का भरोसा दिलाया।

उन्होंने कहा, “दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र एबीवीपी की असली ताकत हैं। हमारे कार्यकर्ता पूरे साल छात्रों के बीच रहते हैं और उनकी समस्याओं को हल करने के लिए काम करते हैं।”

एबीवीपी ने आरोप लगाया कि बाहरी नेता और संगठन ‘नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया’ (एनएसयूआई) के लिए प्रचार करके छात्र राजनीति में दखल दे रहे हैं।

उसने दावा किया कि युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब और कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने एनएसयूआई के लिए प्रचार करने के वास्ते कक्षाओं का दौरा किया था।

एबीवीपी ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार के दौरान युवा कांग्रेस और सेवा दल के साथ-साथ आम आदमी पार्टी (आप) से जुड़े लोग भी सक्रिय थे।

हिंसा, बाहरी लोगों की मौजूदगी और लिंगदोह समिति की सिफारिशों के कथित उल्लंघन पर दिल्ली उच्च न्यायालय की टिप्पणियों का स्वागत करते हुए सोलंकी ने 16 सितंबर की घटना में शामिल लोगों के खिलाफ तुरंत पुलिस कार्रवाई की मांग की।

उन्होंने कहा, “16 सितंबर को एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर हमला करने वालों की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए। किसी भी तरह की हिंसा स्वीकार्य नहीं है।”

भाषा पारुल माधव

माधव


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