भूपेंद्र यादव के सहयोगियों को हटाने का कारण ‘बहुत बड़ा घोटाला’ : कांग्रेस

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भूपेंद्र यादव के सहयोगियों को हटाने का कारण 'बहुत बड़ा घोटाला' : कांग्रेस

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  • Publish Date - July 9, 2026 / 11:52 AM IST,
    Updated On - July 9, 2026 / 11:52 AM IST

नयी दिल्ली, नौ जुलाई (भाषा) कांग्रेस ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के चार सहयोगियों को पद से हटाए जाने के मुद्दे पर बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि इस कार्रवाई के पीछे कोई ‘‘बहुत बड़ा घोटाला’’ है।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि जून, 2025 से केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा राजस्थान सरकार द्वारा सरिस्का (अलवर के निकट) के ‘क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट’ (बाघ अभ्यारण) की सीमा का पुनर्निर्धारण करने के प्रयास किए गए।

पूर्व पर्यावरण मंत्री रमेश ने आरोप लगाया कि इससे 50 से अधिक खनन कंपनियों को दोबारा संचालन की अनुमति मिल सकती है, जबकि पहले इनकी गतिविधियां बंद कर दी गई थीं।

उन्होंने कहा, ‘‘20 सितंबर 2025 को भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई) ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजे एक पत्र में अरावली पर्वतमाला की परिभाषा में बदलाव के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया था। एफएसआई का कहना था कि इससे क्षेत्र में खनन और रियल एस्टेट विकास का रास्ता खुल जाएगा।’’

रमेश ने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित उच्च अधिकार प्राप्त समिति और न्यायालय के न्याय मित्र ने भी एफएसआई के रुख का समर्थन किया था, लेकिन इसके बावजूद मंत्रालय ने पुनर्परिभाषा का समर्थन किया।

उन्होंने कहा, ‘‘केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री के चार करीबी सहयोगियों को अचानक हटाए जाने की हालिया घटनाओं के संदर्भ में इन तथ्यों को याद किया जाना चाहिए।’’

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, ‘‘यह शीर्ष स्तर पर समुचित जांच-पड़ताल और जवाबदेही के पूरी तरह ध्वस्त होने को दर्शाता है। निस्संदेह कोई बहुत बड़ा घोटाला हुआ है, जिसके कारण बर्खास्तगी की कार्रवाई हुई है।’’

उल्लेखनीय है कि पर्यावरण मंत्रालय ने एक साथ एक निजी सचिव और दो अतिरिक्त निजी सचिवों को हटा दिया है।

विभाग के मंत्री भूपेंद्र यादव के निजी सचिव को “प्रशासनिक आधार” पर हटा दिया गया, जबकि एक अतिरिक्त निजी सचिव की सेवा खत्म कर दी गई और दूसरे अतिरिक्त निजी सचिव को उनके मूल कैडर में “समय से पहले वापस” भेज दिया गया।

भाषा हक मनीषा

मनीषा