कांग्रेस ने केंद्र से जनगणना प्रश्नावली में जाति और श्रेणी के लिए अलग कॉलम की मांग

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कांग्रेस ने केंद्र से जनगणना प्रश्नावली में जाति और श्रेणी के लिए अलग कॉलम की मांग

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  • Publish Date - September 5, 2026 / 08:35 PM IST,
    Updated On - September 5, 2026 / 08:35 PM IST

जयपुर, पांच सितंबर (भाषा) कांग्रेस ने शनिवार को जातीय जनगणना कराने के केंद्र के फैसले की मंशा पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार की ओर से अधिसूचित प्रश्नावली में लोगों की जाति और सामाजिक श्रेणी दर्ज करने के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं किया गया है।

दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने यहां राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आगामी डिजिटल जनगणना में व्यक्ति की सामाजिक श्रेणी और जाति के लिए अलग-अलग ‘कॉलम’ होने चाहिए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लगातार दबाव के बाद केंद्र ने जातीय जनगणना की घोषणा की।

यादव ने कहा कि इन संगठनों की मांग थी कि सरकारी योजनाओं और संसाधनों का लाभ समाज के वंचित वर्गों तक पहुंचाया जाए।

उन्होंने कहा कि 22 जनवरी 2026 को जारी सरकारी अधिसूचना से यह सवाल उठता है कि क्या केंद्र सरकार वास्तव में जाति संबंधी सही आंकड़े जुटाना चाहती है।

उन्होंने अधिसूचना के बिंदु संख्या 12 का हवाला देते हुए कहा कि इसमें परिवार के मुखिया के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या ‘‘अन्य’’ श्रेणी से संबंधित होने के बारे में पूछा गया है, लेकिन व्यक्ति की वास्तविक जाति दर्ज करने का प्रावधान नहीं है।

यादव ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर केंद्र को पत्र लिखकर आपत्ति जताई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जाति संबंधी जानकारी एकत्र करने के लिए स्पष्ट व्यवस्था नहीं की है।

उन्होंने कहा कि बाद में केंद्र सरकार ने कहा कि जनगणना के अगले चरण में जब जनगणना कर्मी घर-घर जाएंगे तब जाति संबंधी जानकारी एकत्र की जाएगी।

यादव ने इस स्पष्टीकरण को खारिज करते हुए कहा कि जनगणना डिजिटल माध्यम से हो रही है और प्रश्नावली में बदलाव करना मुश्किल नहीं है।

उन्होंने बताया कि जनसंख्या की गणना फरवरी 2027 में शुरू होनी है।

कांग्रेस नेता ने सुझाव दिया कि डिजिटल प्रश्नावली में दो अलग-अलग ‘ड्रॉपडाउन फील्ड’ होने चाहिए—एक में सामाजिक श्रेणी, जैसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग, और दूसरे में संबंधित व्यक्ति की विशिष्ट जाति दर्ज की जाए।

उन्होंने कहा कि यह इसलिए जरूरी है क्योंकि देश के अलग-अलग हिस्सों में एक ही जाति को अलग-अलग नामों से जाना जाता है।

उन्होंने कहा कि उदाहरण के तौर पर कुछ लोग स्वयं को सैनी और कुछ माली बताते हैं, जबकि यादव समुदाय के कुछ लोग अहीर नाम का इस्तेमाल करते हैं।

यादव ने कहा कि विभिन्न आयोगों के पास उपलब्ध जातीय आंकड़ों के आधार पर मानकीकृत ड्रॉपडाउन सूची तैयार की जा सकती है, जिससे नामों में होने वाली भिन्नता को दूर करने और अधिक सटीक आंकड़े जुटाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और राज्यों के पिछड़ा वर्ग आयोगों के पास उपलब्ध आंकड़ों का इस्तेमाल डिजिटल प्रश्नावली के लिए जातियों की सूची तैयार करने में किया जा सकता है।

यादव ने आरोप लगाया कि यदि लोगों की सामाजिक श्रेणी और वास्तविक जाति दोनों दर्ज नहीं की गईं तो जातीय जनगणना कराने का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार जनगणना डिजिटल तरीके से करा रही है। वह आसानी से दो कॉलम जोड़ सकती है-एक श्रेणी के लिए और दूसरा जाति के लिए।’’

उन्होंने जनसंख्या गणना शुरू होने से पहले प्रश्नावली में आवश्यक बदलाव करने की मांग की और आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर ऐसी व्यवस्था से बच रही है।

भाषा बाकोलिया जोहेब

जोहेब