नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) राज्यसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानन्द राय ने मंगलवार को कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों पर जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण संबंधी कानून को ठीक से लागू नहीं कर ‘‘देश एवं लोकतंत्र के साथ धोखा करने’’ का आरोप लगाया और दावा किया कि वर्तमान सरकार इन दोनों के सार्वभौमिक पंजीकरण के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रही है।
उच्च सदन में गृह राज्य मंत्री नित्यानन्द राय ने विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी और हंगामे के बीच जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि विलंब से जन्म और मृत्यु पंजीकरण कराने से होने वाले दुरूपयोग को रोकने के लिए इसमें कई प्रावधान किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ पार्टियां चाहती हैं कि जिन बच्चों का जन्म किसी अन्य देश में हुआ है, ऐसे बच्चों का भी जन्म भारत में दिखाया जाए और इसके लिए कानून की खामियों का फायदा उठाया जाता है। उन्होंने आगाह किया कि अब ऐसा नहीं हो पाएगा।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि इसमें किसी भी सही व्यक्ति के लिए कोई रोक नहीं है तथा इस प्रक्रिया का डिजिटलीकरण किया गया है। उन्होंने कहा कि देश में साढ़े तीन लाख से अधिक पंजीकरण केन्द्र हैं।
उन्होंने सदन को सूचित किया देश में जन्म पंजीकरण स्तर 2014 में 86.6 प्रतिशत था जो 2024 में बढ़कर 99.8 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने कहा कि मृत्यु के मामले में यह आंकड़ा क्रमश: 72.5 प्रतिशत था जो बढ़कर 99.4 प्रतिशत हो गया है।
राय ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों ने जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र के माध्यम से देश एवं लोकतंत्र के साथ धोखा किया था।
मंत्री ने कहा कि सरकार जन्म एवं मृत्यु के सार्वभौमिक लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि जन्म या मृत्यु होने के दो वर्ष के बाद यदि सूचना दी जाती है तो ऐसे मामलों में केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही रजिस्ट्रार पंजीकरण करेंगे। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में जन्म और मृत्यु के दो वर्ष के भीतर सूचना देने वाले मामलों में जो पुराने प्रावधान लागू हैं, उनमें कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
उन्होंने दो साल से अधिक की अवधि वाले मामलों के लिए प्रावधानों में बदलाव करने का कारण स्पष्ट करते हुए कहा, ‘‘देश चाहता है कि भारत माता की गोद में पैदा होने वाली हर संतान का रजिस्ट्रेशन हो…यह मोदी सरकार का संकल्प है। साथ ही जिसकी मृत्यु हो जाती है और वह भूत बनकर तुष्टीकरण करने वाली पार्टियों का मतदाता बना रहता है, ऐसे भूतों से देश छुटकारा चाह रहा है।’’
राय ने कहा कि इसलिए समय से मृत्यु का पंजीकरण भी जरूरी है।
मंत्री के जवाब के बाद सदन ने इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है।
भाषा
माधव मनीषा अविनाश
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