बेंगलुरु, 16 सितंबर (भाषा) कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बुधवार को आरोप लगाया कि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने का मोदी सरकार का कदम आम भारतीयों के साथ ‘विश्वासघात’ है और इससे अंततः उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
राज्यसभा सदस्य सुरजेवाला ने 14 सितंबर, जिस दिन इस संबंध में राजपत्र अधिसूचना जारी की गई, को ‘डिजिटल उलटफेर’ और ‘विश्वासघात व समर्पण’ का दिन बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने 2,000 रुपये से अधिक के ‘पर्सन टू मर्चेंट’ लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाकर आगे और शुल्क लगाने का रास्ता खोल दिया है।
उन्होंने दावा किया कि सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) इस शुल्क को बढ़ा सकते हैं या इसे यूपीआई लेनदेन की अन्य श्रेणियों पर भी लागू कर सकते हैं।
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार अमेरिकी कंपनियों के दबाव के आगे झुक रही है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में काम कर रही अमेरिकी कंपनियों को पहली बार 5,040 करोड़ रुपये के यूपीआई लेनदेन कर में हिस्सा मिलेगा, जबकि पहले यह लेनदेन पूरी तरह मुफ्त था।
सुरजेवाला ने एक बयान में कहा, ‘‘यूपीआई कैशलेस, डिजिटल और समावेशी भारत के निर्माण का एक महत्वपूर्ण माध्यम था, लेकिन मोदी सरकार इसे टैक्स लगाने और वसूली की मशीन में बदल रही है।’’
यहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने प्रभावी रूप से ‘‘लेनदेन-कर-मुक्त यूपीआई’’ व्यवस्था से ऐसी व्यवस्था की ओर कदम बढ़ाया है, जिसमें संसद से नई मंजूरी लिए बिना शुल्क लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि यह कदम सरकार के पहले के डिजिटल और कैशलेस भारत के दृष्टिकोण को कमजोर करेगा। उन्होंने इसे आम भारतीयों के साथ ‘‘विश्वासघात, पीठ में छुरा घोंपना और दोहरा धोखा’’ करार दिया।
भाषा शोभना मनीषा
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