सुलतानपुर (उप्र), 16 सितम्बर (भाषा) उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर की एक विशेष अदालत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ जारी मानहानि मामले में वादी पक्ष को बुधवार को अंतिम मौका देते हुए बहस के लिए 21 सितंबर की तारीख नियत की।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि मामले में बुधवार को सुनवाई टल गई। शिकायतकर्ता भाजपा नेता विजय मिश्र के वकील संतोष कुमार पांडेय ने अदालत से बहस के लिए और मोहलत मांगी।
उन्होंने बताया कि वह धार्मिक आयोजन में व्यस्त होने के कारण तैयारी नहीं कर पाए थे।
राहुल गांधी के वकील काशी प्रसाद शुक्ला ने बताया कि सांसदों/विधायकों से संबंधित मामलों की सुनवाई करने वाले विशेष मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने संतोष कुमार पांडेय को चेतावनी के साथ अंतिम मौका दिया।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी।
पिछली सुनवाई तीन सितंबर को हुई थी। तब शिकायतकर्ता भाजपा नेता के वकील ने अदालत को बताया था कि इस मामले में एक सितंबर को उच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल की गई है।
वर्ष 2018 में बेंगलुरु में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष और मौजूदा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ गांधी ने आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसी मामले में चार अगस्त 2018 को जिला सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन एवं भाजपा नेता विजय मिश्र ने रायबरेली से कांग्रेस सांसद गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था।
इस मामले में अदालत ने 27 नवंबर 2023 को गांधी को पेश होने के लिए तलब किया था। जब वह पेश नहीं हुए, तो उनके खिलाफ वारंट जारी हुआ। इसके बाद गांधी 20 फरवरी 2024 को अदालत में हाजिर हुए और जमानत ली। उन्होंने 25-25 हजार रुपये के दो मुचलके भरे थे।
गांधी ने 26 जुलाई 2024 को अपना बयान दर्ज कराया था। इससे पहले, 20 फरवरी को भी वह अदालत में पेश हुए थे, जहां उनका बयान दर्ज किया गया था।
इस बीच मिश्र ने 28 मार्च 2026 को गांधी की आवाज के नमूने का मिलान उस कॉम्पैक्ट डिस्क (सीडी) से कराने की मांग की, जिसे उन्होंने विशेष अदालत में जमा किया था। ऐसा बताया जाता है कि इस सीडी में बेंगलुरु में राहुल गांधी के 2018 के चुनावी भाषण की वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है।
निचली अदालत ने दो मई को यह अर्जी खारिज कर दी थी। इसके खिलाफ सत्र अदालत में दायर अर्जी भी 15 जुलाई को खारिज हो गई थी। इस बीच, मिश्र ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, लेकिन वहां से भी उन्हें इस मामले में राहत नहीं मिली।
भाषा सं जफर सुरेश
सुरेश