कांग्रेस विधायक ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा के कामकाज में ‘नौकरशाही के हस्तक्षेप’ का मुद्दा उठाया

कांग्रेस विधायक ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा के कामकाज में ‘नौकरशाही के हस्तक्षेप’ का मुद्दा उठाया

कांग्रेस विधायक ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा के कामकाज में ‘नौकरशाही के हस्तक्षेप’ का मुद्दा उठाया
Modified Date: September 29, 2026 / 03:35 pm IST
Published Date: September 29, 2026 3:35 pm IST

श्रीनगर 29 सितंबर (भाषा) कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन भट ने मंगलवार को विधानसभा के कामकाज में नौकरशाही के कथित हस्तक्षेप का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह विधानसभा अध्यक्ष और सरकार की शक्तियों को चुनौती देता है।

जम्मू कश्मीर विधानसभा में अपने संबोधन में भट ने अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर से विधि सचिव के पत्र को सदन के रिकॉर्ड में शामिल करने का आग्रह किया।

भट राज्य का दर्जा बहाल करने संबंधी प्रस्ताव को लेकर मुख्य सचिव और विधि सचिव द्वारा राथर को लिखे गए पत्रों का जिक्र कर रहे थे, जिसे सोमवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुलल्ला ने विधानसभा में पेश किया और सदन ने पारित किया।

बांदीपुरा के विधायक ने कहा, ‘‘मुख्य सचिव और विधि सचिव ने पत्र लिखकर प्रस्ताव के खिलाफ सलाह दी थी। यह विधानसभा अध्यक्ष और सरकार की शक्तियों को चुनौती देता है। मैं यह समझना चाहता हूं कि क्या अधिकारी सरकार के रूप में काम कर सकते हैं?’’

उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद कानून और संविधान के तहत सरकार का गठन किया गया था।

उन्होंने सवाल किया, ‘‘अगर इस सदन की शक्तियों को इस तरह सीमित किया जाता है, तो हम यहां क्यों हैं? हम क्या कर रहे हैं?’’ भट ने कहा कि मंत्री जनता के प्रति जवाबदेह हैं, लेकिन वे बंधे हुए हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वे (नौकरशाह) विधानसभा अध्यक्ष के अधिकार को चुनौती दे रहे हैं। इस पत्र को रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाना चाहिए और सदन में इस पर चर्चा होनी चाहिए। क्या यह विधानमंडल कोई पंचायत है?’’

जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक नजीर गुरेजी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस सदन की गरिमा को चुनौती दे रही है।

प्रस्ताव की आवश्यकता और राज्य का दर्जा बहाल किए जाने की जरूरत पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने केंद्र शासित प्रदेश के रूप में कामकाज करने में आने वाली व्यावहारिक प्रशासनिक चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने नौकरशाही के गंभीर हस्तक्षेप और प्रशासनिक गतिरोध का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को प्रस्ताव के संबंध में कानून विभाग की राय मिली थी, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी।

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘विधि मंत्री होने के नाते मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है; विधि सचिव ने आपको (विधानसभा अध्यक्ष को) राय भेजी। मुख्य सचिव ने भी आपको प्रस्ताव पर अपनी राय भेजी। लेकिन मुझे इसकी जानकारी नहीं है। ऐसा केवल केंद्र शासित प्रदेश में हो सकता है, राज्य में नहीं।’’

उन्होंने प्रशासनिक देरी की ओर भी इशारा किया, जिसमें दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की अनसुलझी समस्याएं भी शामिल हैं।

भाषा तान्या दिलीप

दिलीप

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