तेलंगाना में कांग्रेस का पिछला रिकॉर्ड खराब रहा है: बीआरएस नेता कविता ने ‘छह गारंटी’ पर कहा
तेलंगाना में कांग्रेस का पिछला रिकॉर्ड खराब रहा है: बीआरएस नेता कविता ने ‘छह गारंटी’ पर कहा
हैदराबाद, 18 सितंबर (भाषा) कांग्रेस द्वारा तेलंगाना में सत्ता में आने पर ‘छह गारंटी’ लागू करने की हालिया घोषणा को तवज्जो न देते हुए भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की विधान परिषद सदस्य के. कविता ने सोमवार को कहा कि विपक्षी दल का “ट्रैक रिकॉर्ड” सकारात्मक नहीं रहा है।
‘पीटीआई-भाषा’ से बात करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 60 वर्षों में जब कांग्रेस सत्ता में थी, तो वह पूरी तरह से भ्रष्टाचार में “डूबी” थी। उन्होंने कहा कि उस समय की सरकार ने जो भी योजनाएं शुरू कीं, उनका लोगों तक कोई वितरण सुनिश्चित नहीं किया गया।
कविता ने कहा, “जब किसी राजनीतिक दल की बात आती है, तो लोग आमतौर पर उनके ट्रैक रिकॉर्ड को देखेंगे। राज्य में कांग्रेस पार्टी का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद खराब रहा है।”
तेलंगाना विधानसभा चुनाव से पहले, कांग्रेस ने रविवार को छह गारंटियों की घोषणा की, जिसमें महिलाओं के लिए 2,500 रुपये प्रति माह और 500 रुपये में गैस सिलेंडर के साथ-साथ पार्टी के राज्य में सत्ता में आने पर सभी घरों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा शामिल है।
कांग्रेस पार्टी की छह गारंटियों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने जवाब दिया, “बीआरएस का ट्रैक रिकॉर्ड जुझारू (दल) वाला रहा है, कांग्रेस का ट्रैक रिकॉर्ड धोखेबाज का रहा है। बीआरएस का ट्रैक रिकॉर्ड ‘इरिगेशन’ का है, और उनका (कांग्रेस का) ट्रैक रिकॉर्ड ‘माइग्रेशन’ (पलायन करने वाला) रहा है।”
बीआरएस सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाने पर राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव की बेटी ने कहा कि कांग्रेस नेता को यह दावा करने से पहले अपनी पटकथा की जांच करनी चाहिए कि कालेश्वरम परियोजना में एक लाख करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है, जिसकी लागत केवल 80,000 करोड़ रुपये है।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी पहले सत्ता में रहते हुए अपने वादे के मुताबिक गरीब लोगों के लिए घर बनाती थी, लेकिन अब तेलंगाना में किसी को घर की जरूरत नहीं है।
कविता ने आरोप लगाया कि अतीत में कांग्रेस की सरकारों ने ही तेलंगाना का आंध्र प्रदेश में विलय किया और राज्य के गठन में भी देरी की, जिसके परिणामस्वरूप कई युवाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी।
भाषा
प्रशांत दिलीप
दिलीप

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