नयी दिल्ली, 15 जनवरी (भाषा) कांग्रेस ने अरावली के मुद्दे पर बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘‘जो लोग विनाश के लिए निकले थे, वे अब खुद को उद्धारक के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।’’
देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी की यह प्रतिक्रिया पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के बयान के एक दिन आई है जिसमें उन्होंने दावा किया था कि अरावली क्षेत्र में पिछले दो से तीन वर्षों में हजारों हेक्टेयर भूमि को उसकी पुरानी स्थिति में बहाल किया गया है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ‘‘कुछ समय पहले (नरेन्द्र) मोदी सरकार ने अरावली की परिभाषा बदलने की भरपूर कोशिश की थी, जिससे उस संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को और ज़्यादा नुकसान होता। सौभाग्य से, उच्चतम न्यायालय ने हस्तक्षेप किया और इन कोशिशों को नाकाम कर दिया (कम से कम अभी के लिए)।’’
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री ने इस नयी परिभाषा का आक्रामक रूप से बचाव किया था और इसे लागू करने के लिए सक्रिय कदम भी उठाए थे।
रमेश ने कहा, ‘‘लेकिन रातों-रात उन्हें अपना रुख बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा और हार के बावजूद जीत का दावा करने की कोशिश की गई। अब वही मंत्री अरावली में इको-रिस्टोरेशन परियोजनाएं शुरू करने के मोदी सरकार के इरादे की घोषणा कर रहे हैं। जो लोग विनाश के लिए निकले थे, वे अब छवि प्रबंधन में जुटे हैं और खुद को उद्धारक के रूप में पेश कर रहे हैं।’’
यादव के बुधवार को कहा था कि ‘‘सरकार अरावली पर्वतमाला और देश भर में इसी तरह के पारिस्थितिक तंत्रों को पुनर्स्थापित करने संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।’’
मंत्री ने दावा किया था, ‘‘अरावली क्षेत्र में पिछले दो से तीन वर्षों में हजारों हेक्टेयर भूमि को पुनर्स्थापित किया गया है, और सरकार विकास के केंद्र में पारिस्थितिकी को रखते हुए इस कार्य को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।’’
भाषा धीरज पवनेश
पवनेश