कांग्रेस ने निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग को लेकर कोलकाता में रैली निकाली

कांग्रेस ने निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग को लेकर कोलकाता में रैली निकाली

कांग्रेस ने निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग को लेकर कोलकाता में रैली निकाली
Modified Date: September 25, 2026 / 04:10 pm IST
Published Date: September 25, 2026 4:10 pm IST

कोलकाता, 25 सितंबर (भाषा) मतदाता सूची के देशव्यापी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर कथित असंतोष संबंधी एक अखबार की खबर के बीच कांग्रेस ने शुक्रवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आयोग कार्यालय तक रैली निकाली। हालांकि, पुलिस ने इसे बीच रास्ते में रोक दिया।

पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार के नेतृत्व में निकाली गई इस रैली में जिलों से आए बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। मार्च कोलकाता विश्वविद्यालय के कॉलेज स्ट्रीट परिसर के बाहर से शुरू हुआ और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के स्ट्रैंड रोड स्थित कार्यालय की ओर बढ़ा।

पुलिस ने मध्य कोलकाता के बी. बी. गांगुली स्ट्रीट चौराहे पर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका और उनकी गिरफ्तारी की मांग की।

सरकार ने कहा कि पार्टी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेगी। उन्होंने कहा, “हम मुख्य निर्वाचन आयुक्त की तत्काल गिरफ्तारी चाहते हैं। यह आम लोगों के अधिकारों का सवाल है।”

कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रैली से शहर में यातायात प्रभावित हो सकता था, इसलिए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि ‘जेन-जी’ को मतदाता सूची से बाहर करने के लिए निशाना बनाया जा रहा है और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के तत्काल इस्तीफे की मांग दोहराई।

पार्टी ने कहा कि 1988 में राजीव गांधी ने मतदान की न्यूनतम आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष की थी।

यह बयान एक अंग्रेजी दैनिक की उस रिपोर्ट के बाद आया, जिसमें कहा गया था कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार उन फैसलों और आदेशों पर आधिकारिक आपत्ति जताई, जिनके बारे में उनका कहना था कि वे उनकी जानकारी के बिना जारी किए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, उस समय एसआईआर लागू करने की प्रक्रिया की निगरानी पूरे आयोग की देखरेख में की जा रही थी।

भाषा संतोष रंजन

रंजन


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