लैंगिक भेदभाव वाली सोच को खत्म करने के लिए आंध्र प्रदेश की स्कूल की किताबों में बदलाव किए: मंत्री
लैंगिक भेदभाव वाली सोच को खत्म करने के लिए आंध्र प्रदेश की स्कूल की किताबों में बदलाव किए: मंत्री
नयी दिल्ली, 25 सितंबर (भाषा) आंध्र प्रदेश के मानव संसाधन विकास मंत्री नारा लोकेश ने कहा कि स्कूल की किताबों में बदलाव किए गए हैं, ताकि लैंगिक रूढ़िवादी सोच को दूर किया जा सके और बच्चों में कम उम्र से ही महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित हो।
मंत्री ने बृहस्पतिवार को दिल्ली में ‘‘पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया’’ द्वारा आयोजित एक चर्चा के दौरान यह बात कही।
उन्होंने स्कूली एवं उच्च शिक्षा में जारी सुधारों का एक खाका भी पेश किया।
लोकेश ने कहा कि इन सुधारों में मूल्य आधारित शिक्षा, लैंगिक समानता के प्रति संवेदनशीलता, प्रौद्योगिकी की मदद से पढ़ाई, पाठ्यक्रम में बदलाव और उद्योग की जरूरतों के अनुसार कौशल विकास पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार यह समीक्षा कर रही है कि पाठ्यक्रमों में कौन से मुख्य विषय और गौण विषय पढ़ाए जा रहे हैं, क्या वे अब भी प्रासंगिक हैं और पाठ्यक्रम बाजार की जरूरतों के कितने अनुकूल हैं।
मंत्री ने कहा, ‘‘पूर्व में पहली और दूसरी कक्षा की किताबों में घर के सारे काम महिलाओं को करते हुए दिखाया जाता था। अब राज्य सरकार ने इसमें बदलाव किया है। किताबों में दिखाए जाने वाले 50 प्रतिशत घरेलू काम पुरुषों और 50 प्रतिशत काम महिलाओं को करते हुए दिखाया जाता है। इसका उद्देश्य पहली कक्षा से ही लड़के और लड़कियों के बीच भेदभाव वाली सोच को रोकना है।’’
आंध्र प्रदेश सरकार में आईटी विभाग का भी प्रभार संभाल रहे लोकेश ने बताया कि विद्यालयों में शनिवार को ‘नो बैग डे’ मनाया जाता है और इस दिन बच्चों को किताबों की बजाय व्यावहारिक और जीवन से जुड़ी चीजें सीखने का मौका मिलता है।
उन्होंने बताया कि इस दौरान बच्चों को परिवार और खेती के बजट का प्रबंधन, मौका-ए-मुआयना एवं कृत्रिम मेधा (एआई) की जानकारी दी जाती है।
लोकेश ने कहा कि विद्यार्थियों को एआई के फायदे और नुकसान दोनों के बारे में बताया जा रहा है, ताकि वे इस तकनीक को समझ सकें तथा अपने चुने हुए क्षेत्र में इसका सही तरीके से इस्तेमाल कर सकें।
भाषा जितेंद्र सुरेश
सुरेश

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