सूखे के बीच डेटा सेंटर उद्योग के विस्तार की नीति को लेकर कांग्रेस ने महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा

सूखे के बीच डेटा सेंटर उद्योग के विस्तार की नीति को लेकर कांग्रेस ने महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा

सूखे के बीच डेटा सेंटर उद्योग के विस्तार की नीति को लेकर कांग्रेस ने महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा
Modified Date: September 27, 2026 / 11:42 am IST
Published Date: September 27, 2026 11:42 am IST

नयी दिल्ली, 27 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र सरकार द्वारा 358 में से 265 तालुकों में सूखा घोषित किए जाने के बाद कांग्रेस ने रविवार को डेटा सेंटर उद्योग के तेजी से विस्तार की नीति पर सवाल उठाए और पूछा कि यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार की क्या योजना है कि इस विस्तार को बढ़ावा देने के लिए राज्य के जल संसाधनों को किसानों एवं आम नागरिकों से छीना न जाए।

महाराष्ट्र सरकार ने बारिश की कमी के बीच शनिवार को राज्य के 358 में से 265 तालुकों में सूखा घोषित किया और फसल ऋण नियमों को आसान बनाने, भू-राजस्व में रियायत तथा बिजली बिलों में सब्सिडी समेत राहत उपायों की घोषणा की।

कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के 358 में से 265 तालुकों में आधिकारिक तौर पर सूखा घोषित किया है, जो राज्य का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि यह ऐसे समय में हो रहा है जब महाराष्ट्र डेटा सेंटर उद्योग का तेजी से विस्तार कर रहा है।

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि राज्य को डेटा सेंटर के लिए 300 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं और 2032 तक 5.7 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

खेड़ा ने कहा, ‘‘डेटा सेंटर के लिए दो महत्वपूर्ण संसाधनों की जरूरत होती है : बिजली और पानी। वे कितनी मात्रा में पानी का इस्तेमाल करते हैं, यह इस्तेमाल की जाने वाली शीतलन तकनीक पर निर्भर करता है, लेकिन पानी की आवश्यकता एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, खासकर महाराष्ट्र जैसे जल संकट वाले क्षेत्रों में।’’

उन्होंने कहा कि सरकार कथित तौर पर ऐसी व्यवस्था बनाने की योजना बना रही है, जिसमें नगर निगम सीवेज का शोधन करेंगे, महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) उसे और अधिक शुद्ध करेगा तथा इसके बाद इस पुनर्चक्रित पानी को डेटा सेंटर और अन्य उद्योगों को बेचा जाएगा।

खेड़ा ने कहा, ‘‘लेकिन कुछ महत्वपूर्ण सवाल उठते हैं: जब महाराष्ट्र का करीब तीन-चौथाई हिस्सा आधिकारिक तौर पर सूखे की चपेट में है, तो यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार की क्या योजना है कि डेटा सेंटर के इस बड़े विस्तार को बढ़ावा देने के लिए राज्य के जल संसाधनों को किसानों और आम नागरिकों से छीना न जाए?’’

उन्होंने पूछा कि महाराष्ट्र जैसे राज्य में, जहां देश में किसान आत्महत्या की दर सबसे अधिक है, पानी पर पहला अधिकार किसका है- किसानों का या डेटा सेंटर का?

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘और अगर राज्य उद्योगों के लिए सीवेज के शोधन और पानी के पुनर्चक्रण का नेटवर्क स्थापित करने को तैयार है, तो किसानों के लिए विश्वसनीय पुनर्चक्रित पानी उपलब्ध कराने में ऐसी तत्परता क्यों नहीं दिखाई गई, जिससे किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाली समस्या कम करने में मदद मिल सकती है?’’

भाषा गोला रंजन

रंजन


लेखक के बारे में