एएफएमस का चिकित्सीय परीक्षणों में किस तरह का योगदान हो सकता है, इस पर विचार करें: राजनाथ

एएफएमस का चिकित्सीय परीक्षणों में किस तरह का योगदान हो सकता है, इस पर विचार करें: राजनाथ

एएफएमस का चिकित्सीय परीक्षणों में किस तरह का योगदान हो सकता है, इस पर विचार करें: राजनाथ
Modified Date: April 6, 2026 / 09:46 pm IST
Published Date: April 6, 2026 9:46 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, छह अप्रैल (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि देश में चिकित्सीय परीक्षणों के ढांचे में सुधार की ज़रूरत है और इस बात पर विचार किया जाना चाहिए कि सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाएँ (एएफएमएस) इस क्षेत्र में किस तरह सार्थक योगदान दे सकती हैं।

सिंह ने यहाँ एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किसी विशिष्ट बीमारी से संबंधित चिकित्सीय अनुभव को व्यवस्थित माध्यमों के ज़रिए अन्य चिकित्सकों तथा अस्पतालों तक पहुँचाने के लिए मज़बूत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और मानकीकृत प्रोटोकॉल बनाने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘इससे तेज़, ज़्यादा असरदार और सबूतों पर आधारित इलाज मिल पाएगा, जिससे न सिर्फ़ व्यक्तिगत क्षमता बढ़ेगी, बल्कि पूरी प्रणाली की कार्यक्षमता भी बेहतर होगी।’’

सिंह ने कहा, ‘‘राष्ट्रीय स्तर का डेटा पूल बनाना इस दिशा में एक बहुत बड़ा कदम होगा। यह नीति बनाने के लिए बेहतर इनपुट देगा, नयी चिकित्सा पद्धतियों को प्रमाणित करने में मदद करेगा, जिससे धीरे-धीरे हमारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली एक ‘प्रतिक्रियाशील’ मॉडल से बदलकर एक ‘सक्रिय’ मॉडल बन जाएगी।’’

आर्मी मेडिकल कोर (एएमसी) के 262वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों के तहत, उन्होंने आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) में नेत्र विज्ञान, कैंसर चिकित्सा विज्ञान और जोड़ प्रतिरोपण केंद्रों की, तथा दिल्ली छावनी स्थित बेस हॉस्पिटल में नयी बुनियादी सुविधाओं की आधारशिला रखी।

इस अवसर पर प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

भाषा नेत्रपाल माधव

माधव


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