यादवपुर विश्वविद्यालय में यज्ञ आयोजित करने को लेकर विवाद

यादवपुर विश्वविद्यालय में यज्ञ आयोजित करने को लेकर विवाद

यादवपुर विश्वविद्यालय में यज्ञ आयोजित करने को लेकर विवाद
Modified Date: August 8, 2026 / 04:30 pm IST
Published Date: August 8, 2026 4:30 pm IST

कोलकाता, आठ अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) की ओर से यादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित प्रतीकात्मक यज्ञ आयोजित करने को लेकर विवाद हो गया है।

विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ ने परिसर में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने का विरोध करते हुए कहा कि इससे अन्य समूहों की ओर से भी इस तरह के कार्यक्रमों की मांग उठ सकती है।

बीएमएस ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन ‘अरविंद भवन’ के सामने यह ‘यज्ञ’ आयोजित किया था। संगठन ने इसे विश्वविद्यालय में कथित ‘‘प्रशासनिक अनियमितताओं’’ के खिलाफ अपने विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बताया।

बीएमएस ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और वित्त अधिकारी अपना कार्यकाल पूरे होने और 60 वर्ष की उम्र पार करने के बाद भी अपने पदों पर बने हुए हैं।

संगठन ने कहा कि इससे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे हैं। बीएमएस ने कहा कि ‘यज्ञ’ का आयोजन विश्वविद्यालय के समग्र विकास और प्रशासन में ‘‘सद्बुद्धि के जागरण’’ की प्रार्थना के उद्देश्य से किया गया था।

आयोजकों ने यह दावा भी किया कि यह अनुष्ठान विश्वविद्यालय के अधिकारियों को प्रभावित करने वाली ‘‘नकारात्मक शक्तियों’’ को प्रतीकात्मक रूप से दूर करने के लिए किया गया।

हालांकि, विश्वविद्यालय के कार्यवाहक रजिस्ट्रार सलीम बख्श मंडल ने बिना अनुमति पुराने धरोहर भवन के सामने आग जलाने पर आपत्ति जताई।

यादवपुर विश्वविद्यालय के सूत्रों के अनुसार, उन्होंने इस घटना की रिपोर्ट कुलपति को सौंप दी है।

कुछ छात्रों ने भी इस कार्यक्रम पर चिंता जताई। इंजीनियरिंग के कुछ छात्रों ने कहा कि वे बिना अनुमति धरोहर भवन के पास ‘यज्ञ’ आयोजित किए जाने को लेकर कुलपति चिरंजीब भट्टाचार्य को लिखित शिकायत सौंपेंगे।

आयोजकों ने कार्यक्रम का बचाव करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के कल्याण के लिए धार्मिक अनुष्ठान करने में कोई गलत बात नहीं है।

उन्होंने कहा कि अगर परिसर में बिना नुकसान पहुंचाए रैलियां और बैठकें आयोजित की जा सकती हैं, तो ‘यज्ञ’ पर भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने भी आयोजकों का समर्थन किया। एबीवीपी ने परिसर में वामपंथी छात्र संगठनों द्वारा कथित तौर पर पहले लगाए गए ‘आजादी’ के नारों का जिक्र करते हुए कहा कि ‘यज्ञ’ का उद्देश्य ऐसे कार्यों से परिसर को प्रतीकात्मक रूप से ‘‘शुद्ध’’ करना भी था।

यादवपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जेयूटीए) ने एक बयान जारी कर परिसर में ‘यज्ञ’ आयोजित करने का कड़ा विरोध किया। संघ ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में इस तरह का अनुष्ठान पहले कभी नहीं हुआ।

जेयूटीए ने कहा कि परिसर में पहले सरस्वती पूजा, विश्वकर्मा पूजा और इफ्तार जैसे कार्यक्रम होते रहे हैं, लेकिन किसी विशेष धार्मिक प्रार्थना के रूप में आयोजित अनुष्ठान इससे अलग है।

संघ ने कहा कि इससे विभिन्न समूहों की ओर से अपने-अपने धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने की मांग उठ सकती है।

शिक्षक संघ ने सवाल उठाया कि अगर इस तरह की गतिविधियों को अनुमति दी जाती है तो क्या विश्वविद्यालय प्रशासन बाद में अन्य धार्मिक समूहों के कार्यक्रमों को रोक पाएगा।

संघ ने कहा कि इस विवाद के जरिये विश्वविद्यालय की गंभीर समस्याओं से ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है, जिनमें शोध कार्यों के लिए धन की कमी, खराब होती इमारतें और मरम्मत के लिए पर्याप्त संसाधनों का अभाव शामिल है।

जेयूटीए ने विश्वविद्यालय समुदाय के सभी वर्गों से अपील की कि वे कक्षाएं चलने के दौरान शैक्षणिक क्षेत्रों में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने से बचें।

भाषा जोहेब संतोष

संतोष


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