सीओपी30 कार्यान्वयन का शिखर सम्मेलन होना चाहिए: मनोनीत अध्यक्ष डो लागो

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सीओपी30 कार्यान्वयन का शिखर सम्मेलन होना चाहिए: मनोनीत अध्यक्ष डो लागो

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  • Publish Date - September 2, 2025 / 10:21 PM IST,
    Updated On - September 2, 2025 / 10:21 PM IST

नयी दिल्ली, दो सितंबर (भाषा) जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन सीओपी30 के मनोनीत अध्यक्ष आंद्रे कोरेया डो लागो ने कहा कि आगामी बेलेम सम्मेलन कार्यान्वयन की ओर बदलाव का प्रतीक होना चाहिए और परिणाम प्राप्त करने के लिए आवश्यक व्यापक हितधारकों की खातिर अपने दरवाजे खोलने चाहिए।

उन्होंने सोमवार को ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद (सीईईडब्ल्यू) तथा ब्राज़ील के दूतावास द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘जैसे-जैसे हम बेलेम सम्मेलन के करीब पहुंच रहे हैं, हमें यह समझना होगा कि विभिन्न हितधारकों… नागरिक समाज, विकासशील देश, विकसित देश और व्यवसाय, प्रत्येक की अपनी-अपनी अपेक्षाएं हैं।’’

लागो ने कहा, ‘‘सीओपी30 के लिए एक ऐसा संतुलन बनाना चुनौती है जो जलवायु व्यवस्था को मजबूत करे और साथ ही इसे प्रतिबंधित और नौकरशाही प्रक्रिया से आगे बढ़ाए।’’

उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन को प्रक्रिया के बजाय कार्रवाई के लिए याद किया जाना चाहिए।

लागो ने कहा, ‘‘इस सीओपी को और अधिक हितधारकों के लिए अपने द्वार खोलने चाहिए जो कार्यान्वयन के लिए आवश्यक होंगे। हमारे पास पहले से ही 500 से अधिक पहल और संकल्प हैं, जिनमें से लगभग 300 अब भी सक्रिय हैं। बेलेम को कार्यान्वयन का सीओपी होना चाहिए जहां हम इन पहल को समाधानों के एक सच्चे स्रोत के रूप में प्रदर्शित करें।’’

सीओपी30 की सीईओ एना टोनी ने कहा कि शिखर सम्मेलन चार स्तंभों वार्ता, स्वयं शिखर सम्मेलन, कार्य एजेंडा और कार्यान्वयन के लिए लामबंदी पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि पेरिस समझौते के एक दशक बाद, वास्तविक आवश्यकता 1300 अरब अमेरिकी डॉलर के वार्षिक वित्त लक्ष्य पर सहमति बनाकर ‘‘एकजुटता को ठोस बनाना’’ है, जिससे प्रौद्योगिकी विनिमय को सक्षम बनाया जा सके और वित्त को शमन और अनुकूलन दोनों से जोड़ा जा सके।

सीईईडब्ल्यू के संस्थापक-सीईओ और दक्षिण एशिया के लिए सीओपी30 के विशेष दूत अरुणाभ घोष ने कहा कि इस परिवर्तन को आकार देने में भारत और ब्राजील की विशेष भूमिका है।

उन्होंने कहा, ‘‘जलवायु नेतृत्व केवल सिर पर पहना जाने वाला ताज नहीं है। इसे कई हाथों द्वारा, सद्भावनापूर्वक, एक समान उद्देश्य के साथ तैयार करना चाहिए।’’

भाषा धीरज अविनाश

अविनाश

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