नयी दिल्ली, 27 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने 2011 में एक महिला की मौत के मामले में लापरवाही और तेज गति से गाड़ी चलाने के दोषी बस चालक को बुधवार को बरी कर दिया।
न्यायालय ने कहा कि चालक ने कंडक्टर के निर्देशों का पालन करते हुए ही गाड़ी चलाई और रोकी।
न्यायालय ने कहा कि कंडक्टर सीटी बजाकर चालक को संकेत देता है जबकि चालक से यह अपेक्षा नहीं की जाती कि वह पीछे मुड़कर देखे कि यात्री बस से उतर चुके हैं या नहीं।
महिला की मौत बस से उतरते समय गिरने से हुई थी।
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एनवी अंजारी की पीठ ने कहा कि महिला फिसल गई होगी क्योंकि बस से उतरते समय उसने शायद सावधानी नहीं बरती थीं।
शिकायतकर्ता ने दावा किया कि जब वह, उसकी भाभी और मां बस से उतर रहे थे, तब चालक लापरवाही से गाड़ी चला रहा था।
उच्चतम न्यायालय कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम में चालक द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रहा था।
अपील में कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304ए के तहत दी गई उसे छह महीने की साधारण कारावास की सजा को बरकरार रखा गया था।
न्यायालय ने कहा कि चालक ने कंडक्टर के निर्देशों का पालन किया और लापरवाही के आरोप से बरी होने का हकदार है।
शीर्ष अदालत ने कहा, “यह मानना संभव नहीं है कि अपीलकर्ता-चालक ने ‘इतने उग्र या लापरवाह तरीके से’ कार्य किया। उसे किसी चूक या ऐसे किसी कार्य का दोषी नहीं ठहराया जा सकता जिसके लिए उसे लापरवाह माना जाए, न ही अपीलकर्ता आईपीसी की धारा 304ए के अंतर्गत आने वाले किसी उग्र या लापरवाह कृत्य का दोषी था।”
पीठ ने कहा, “यह निष्कर्ष निकालना कठिन है कि शोभा की मौत अपीलकर्ता की लापरवाही या तेज गति से गाड़ी चलाने के कारण हुई। यह कहना मुश्किल है कि अपीलकर्ता की लापरवाही को ही निर्णायक रूप से दोषी ठहराया जाए।”
न्यायालय ने कहा कि कंडक्टर बस की आवाजाही को नियंत्रित करने वाला प्रभारी व्यक्ति होता है।
भाषा जितेंद्र नरेश
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