न्यायालय ने टीटीजेड में गैर-प्रदूषणकारी एमएसएमई के लिए लंबित 400 आवेदनों पर विचार की अनुमति दी

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न्यायालय ने टीटीजेड में गैर-प्रदूषणकारी एमएसएमई के लिए लंबित 400 आवेदनों पर विचार की अनुमति दी

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  • Publish Date - July 23, 2026 / 01:31 PM IST,
    Updated On - July 23, 2026 / 01:31 PM IST

नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) प्राधिकरण को ताजमहल के आसपास पारिस्थितिकी की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में गैर-प्रदूषणकारी सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) की स्थापना के लिए लंबित करीब 400 आवेदनों पर विचार करने की अनुमति दे दी।

शीर्ष अदालत ने साथ ही निर्देश दिया कि प्रत्येक प्रस्ताव की जांच केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) और राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (एनईईआरआई) के विशेषज्ञ करेंगे। यदि किसी विशेषज्ञ को किसी प्रस्ताव पर आपत्ति हो तो संबंधित आवेदन न्यायालय की अनुमति के बिना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ टीटीजेड के 10,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले पर सुनवाई कर रही थी। वर्ष 1996 से न्यायालय ने ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए इस क्षेत्र में कड़े प्रतिबंध लागू कर रखे हैं।

पीठ ने कहा कि टीटीजेड के लिए ‘विजन’ दस्तावेज, संचयी प्रभाव आकलन अध्ययन और गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों की परिभाषा पर एनईईआरआई की अंतिम रिपोर्ट अभी लंबित है, लेकिन इनके लंबित रहने के कारण पहले से प्राप्त आवेदनों पर विचार रोकना उचित नहीं होगा।

पीठ ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की इस दलील पर गौर किया कि आटा मिल जैसी गैर-प्रदूषणकारी एमएसएमई की स्थापना संबंधी आवेदनों पर विचार किया जा सकता है।

पीठ ने कहा कि ‘विजन’ दस्तावेज अभी अंतिम रूप नहीं ले पाया है और 22 अप्रैल, 2025 के आदेश के अनुसार संचयी प्रभाव आकलन अध्ययन भी अभी पूरा नहीं हुआ है।

अदालत ने यह भी कहा कि गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों की परिभाषा संबंधी अंतिम रिपोर्ट भी अभी प्रस्तुत नहीं की गई है।

पीठ ने साथ ही निर्देश दिया कि ऐसे आवेदनों पर विचार के लिए होने वाली प्रत्येक बैठक में सीईसी और एनईईआरआई का एक-एक विशेषज्ञ शामिल होगा। दोनों विशेषज्ञों की उपस्थिति के बिना कोई बैठक नहीं होगी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि दोनों में से कोई भी विशेषज्ञ यह राय देता है कि कोई उद्योग गैर-प्रदूषणकारी नहीं है तो संबंधित आवेदन न्यायालय की अनुमति के बिना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

भाषा निहारिका वैभव

वैभव