अदालत ने किशोर को बीमार पिता को लीवर का हिस्सा दान करने की अनुमति दी
अदालत ने किशोर को बीमार पिता को लीवर का हिस्सा दान करने की अनुमति दी
नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने 17 वर्षीय एक किशोर को लंबे समय से यकृत (लीवर) रोग से पीड़ित पिता को लीवर का एक हिस्सा दान करने की अनुमति दे दी है।
न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की एक अवकाशकालीन पीठ ने किशोर की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि किसी नाबालिग द्वारा जीवित अंग दान करने पर कोई ‘‘पूर्ण वैधानिक प्रतिबंध’’ नहीं है, लेकिन इसकी अनुमति केवल असाधारण चिकित्सकीय परिस्थितियों में और कानूनी ढांचे का कड़ाई से पालन करते हुए ही दी जा सकती है।
मानव अंग एवं ऊतक प्रतिरोपण नियम के अनुसार, ‘‘नाबालिगों द्वारा जीवित अंग या ऊतक का दान सामान्यतः अनुमन्य नहीं होगा। हालांकि, असाधारण चिकित्सकीय आधार पर, जिसका विस्तृत रिकॉर्ड और पूरा औचित्य दर्ज किया गया हो तथा सक्षम प्राधिकारी एवं संबंधित राज्य सरकार की पूर्व अनुमति प्राप्त हो, इसकी अनुमति दी जा सकती है।’’
सोमवार को पारित आदेश में न्यायमूर्ति पुष्करणा ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता पर की जाने वाली चिकित्सकीय प्रक्रिया उसकी स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी कानूनी, नैतिक और चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन करते हुए उचित तरीके से की जाए।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ही एकमात्र उपयुक्त दाता है और वह अपनी इच्छा से, पिता के प्रति प्रेम एवं स्नेह के कारण लीवर का एक हिस्सा दान करना चाहता है। अदालत ने कहा कि अनुमति नहीं दिए जाने पर उसके पिता की जान जा सकती है।
याचिकाकर्ता के पिता का उपचार कर रहे इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बाइलरी साइंसेज (आईएलबीएस) ने अदालत को बताया कि आदेश के अनुपालन में जल्द ही प्रतिरोपण के लिए तिथि निर्धारित की जाएगी।
दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि इस मामले में उपराज्यपाल और सक्षम प्राधिकारी भी अनुमति दे चुके हैं।
भाषा अमित नरेश
नरेश

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