अदालत ने एमसीडी और एनडीएमसी को आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए कार्यक्रम शुरू करने को कहा

अदालत ने एमसीडी और एनडीएमसी को आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए कार्यक्रम शुरू करने को कहा

अदालत ने एमसीडी और एनडीएमसी को आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए कार्यक्रम शुरू करने को कहा
Modified Date: August 3, 2026 / 08:32 pm IST
Published Date: August 3, 2026 8:32 pm IST

नयी दिल्ली, तीन अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को यहां के नगर निकाय अधिकारियों से आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए एक प्रायोगिक कार्यक्रम शुरू करने को कहा।

न्यायमूर्ति दिनेश मेहता और न्यायमूर्ति रजनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और नयी दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) से कहा कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों के तहत एक-एक वार्ड में नसबंदी शिविर आयोजित करें। साथ ही, इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करें कि आवारा कुत्तों को पकड़ा नहीं जा रहा है और न ही इन्हें कहीं ले जाया जा रहा है।

पीठ ने मौखिक रूप से यह भी टिप्पणी की कि अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आवारा कुत्तों की कुल आबादी में से कम से कम पांच प्रतिशत को बचाया जाए, ताकि उनकी संख्या बहुत अधिक न घट जाए और आने वाली पीढ़ी भी आवारा कुत्तों को देख सके।

अदालत ने आदेश में कहा, ‘‘एनडीएमसी और एमसीडी अपने-अपने क्षेत्रों में एक-एक वार्ड में आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए एक शिविर आयोजित करेंगे। यह शिविर न्यायमित्र के परामर्श से लगाया जाएगा और इसे एक प्रायोगिक परियोजना के रूप में लिया जाएगा। इस शिविर का क्षेत्र में पहले से ही प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए और व्यापक जानकारी के लिए एक सूचना-पट्ट लगाया जाना चाहिए, जिसमें स्पष्ट रूप से बताया जाए कि आवारा कुत्तों को कहीं शिविर आदि में भेजने के लिए पकड़ा नहीं जा रहा है, बल्कि उन्हें केवल नसबंदी/टीकाकरण के लिए शिविर में लाया जा रहा है।’’

पीठ उस स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसे उच्च न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के आधार पर शुरू किया था।

सुनवाई के दौरान एमसीडी के वकील ने कहा कि हालांकि कोई आधिकारिक आंकड़ा या गणना उपलब्ध नहीं है, लेकिन अनुमान है कि राजधानी में लगभग आठ लाख आवारा कुत्ते हैं।

भाषा देवेंद्र नरेश

नरेश


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