अदालत ने कोविड-19 पीड़ितों के परिवहन, दाह संस्कार के मामले को बंद किया

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अदालत ने कोविड-19 पीड़ितों के परिवहन, दाह संस्कार के मामले को बंद किया

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  • Publish Date - September 14, 2022 / 07:27 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:09 PM IST

नयी दिल्ली, 14 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने कोविड-19 से मरने वालों के शवों को लाने- ले जाने और दाह संस्कार के लिए बुनियादी ढांचे से संबंधित एक मामले को बुधवार को यह कहते हुए बंद कर दिया कि महामारी लगभग खत्म हो चुकी है।

याचिकाकर्ता पेशे से वकील मुजीब उर रहमान ने हालांकि, इस मामले में प्रतिक्रिया दर्ज कराने में विफल रहने के लिए दिल्ली सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का अदालत से अनुरोध किया। याचिकाकर्ता ने यह दावा किया कि राजधानी की सरकार ने मई 2021 में दायर इस जनहित याचिका के निष्प्रभावी होने का इंतजार किया। याचिकाकर्ता ने इस तरह के ‘संवेदनहीन रवैये’ की निंदा भी की।

मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता ने कहा, “राज्य सरकार ने एक हलफनामा तक दायर नहीं किया है। यह याचिका निष्प्रभावी हो गई है। सरकार मेरी याचिका के निष्प्रभावी होने का इंतजार कर रही थी। मैं जुर्माना लगाने की अपील करता हूं। राज्य इंतजार कर रहा था। जनता सरकार से इस तरह के संवेदनहीन रवैये की उम्मीद नहीं करती। कृपया राज्य पर भारी जुर्माना लगाएं और मेरी याचिका वापस लिये जाने के संदर्भ में खारिज कर दी जाए।

‘दिल्ली सरकार पर कितना जुर्माना लगाया जाए’, अदालत के इस सवाल के जवाब में याचिकाकर्ता ने कहा, ‘‘10 लाख रुपये।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘(सरकार के आचरण के मद्देनजर) कोई भी जुर्माना लगाया जा सकता है, भले ही वह एक रुपया ही क्यों न हो।’’

हालांकि अदालत ने कोई भी जुर्माना लगाने का निर्देश पारित करने से परहेज करते हुए कहा कि याचिका तब दायर की गई थी जब कोविड-19 महामारी अपने चरम पर थी। अदालत ने यह भी कहा कि इस स्तर पर आगे कोई आदेश नहीं मांगा गया था।

अदालत ने अपने आदेश में कहा, “इसे देखते हुए,चूंकि कोविड-19 महामारी लगभग समाप्त हो गई है, याचिका पर आगे कोई आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है। (याचिकाकर्ता को) भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर कानून के तहत उपलब्ध उपायों का सहारा लेने की स्वतंत्रता दी जाती है।’’ हालांकि अदालत ने आगाह किया कि इस तरह की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि दिल्ली सरकार के अनुसार महामारी लगभग खत्म हो चुकी थी और जरूरतमंदों को सहायता प्रदान करने के लिए एक टेलीफोन हेल्पलाइन मौजूद थी।

याचिका में कोरोना वायरस महामारी से बड़ी संख्या में मरने वाले लोगों के शव रखने के लिए पर्याप्त संख्या में मुर्दाघर बनाने की भी मांग की गई है।

याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि चिकित्सा सुविधाओं की कमी के अलावा, दिल्ली के लोग पर्याप्त संख्या में मुर्दाघर, परिवहन सुविधाओं और दाह संस्कार या दफनाने के लिए जगह की कमी से पीड़ित हैं।

याचिका में एक ऐसे व्यक्ति की दुर्दशा का उल्लेख किया गया था, जिसके माता-पिता ने घर पर रहते हुए संक्रमण के कारण दम तोड़ दिया था और लगभग एक दिन तक उसे अंतिम संस्कार के लिए कोई मदद नहीं मिली , क्योंकि पड़ोसी संक्रमित होने से डर रहे थे।

याचिका में दावा किया गया था कि जब तक उन्हें कोई सहायता मिलती, तब तक शव सड़ने लगे थे।

भाषा सुरेश नरेश

नरेश