अदालत ने अजा/अजजा अधिनियम मामले में यूट्यूबर अजीत भारती को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया

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अदालत ने अजा/अजजा अधिनियम मामले में यूट्यूबर अजीत भारती को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया

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  • Publish Date - September 24, 2026 / 03:46 PM IST,
    Updated On - September 24, 2026 / 03:46 PM IST

नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को यूट्यूबर अजीत भारती को नगीना के सांसद चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ कथित जातिसूचक टिप्पणी करने के मामले में अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने भारती की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

अदालत ने भारती, दिल्ली पुलिस और शिकायतकर्ता आजाद के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद 16 सितंबर को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।

भारती ने सात सितंबर को यहां एक अधीनस्थ अदालत द्वारा अग्रिम जमानत देने से इनकार किए जाने के बाद उच्च न्यायालय का रुख किया था।

दिल्ली पुलिस और शिकायतकर्ता ने याचिका का विरोध किया था।

पुलिस की ओर से पेश वकील ने दलील दी थी कि आरोपी द्वारा कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए शब्द सीधे तौर पर एक जाति विशेष का अपमान करते हैं। वहीं, आजाद के वकील ने अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि कथित टिप्पणियां अपमानजनक थीं और जानबूझकर की गईं।

हालांकि, भारती के वकील ने राहत की मांग करते हुए कहा था कि इस मामले में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 लागू नहीं होता क्योंकि जानबूझकर अपमान या बेइज्जती करने का कोई इरादा नहीं था और यूट्यूबर की टिप्पणियों को उस संदर्भ में देखा जाना चाहिए जिसमें वे की गई थीं।

भीम आर्मी के प्रमुख आजाद ने दिल्ली पुलिस में दर्ज शिकायत में आरोप लगाया है कि भारती ने सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ, अनुसूचित जाति समुदाय के सदस्यों तथा बी. आर. आंबेडकर के खिलाफ जाति सूचक और अपमानजनक बयान दिए।

इस मामले में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

भाषा शफीक पवनेश

पवनेश