रामभद्राचार्य के खिलाफ प्राथमिकी के अनुरोध वाली याचिका खारिज

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रामभद्राचार्य के खिलाफ प्राथमिकी के अनुरोध वाली याचिका खारिज

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  • Publish Date - September 5, 2026 / 09:24 PM IST,
    Updated On - September 5, 2026 / 09:24 PM IST

प्रयागराज, पांच सितंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उपाध्याय समुदाय और धर्मगुरुओं के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर जगद्गुरु रामभद्राचार्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के अनुरोध वाली रिट याचिका खारिज कर दी है।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने संबंधित मजिस्ट्रेट से संपर्क किए बगैर सीधे उच्च न्यायालय से संपर्क किया।

हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को कानून के तहत उपलब्ध उचित उपचार अपनाने की छूट दी।

न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की पीठ ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज नहीं किए जाने से व्यथित व्यक्ति को सबसे पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत उपलब्ध कानूनी उपायों को अपनाना चाहिए।

इस प्रकार से अदालत ने वाराणसी के रमेश उपाध्याय नामक व्यक्ति द्वारा दायर रिट याचिका खारिज कर दी।

याचिकाकर्ता के मुताबिक, वह उपाध्याय समुदाय से आते हैं और जगद्गुरु रामभद्राचार्य द्वारा दिए गए कथित बयानों से उन्हें और उनके समुदाय के लोगों को गंभीर मानसिक पीड़ा हुई और अपमान महसूस हुआ।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने उपाध्यायों को निम्न/हीन बताया और चारों शंकराचार्यों को फर्जी करार दिया जिससे कई अनुयायियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

याचिकाकर्ता ने कहा कि ये बयान और वीडियो यूट्यूब सहित सोशल मीडिया मंचों पर प्रसारित किए गए।

याचिकाकर्ता ने कहा कि उन्होंने आठ अक्टूबर, 2025 को वाराणसी के पुलिस आयुक्त को एक शिकायती पत्र सौंपा था। हालांकि, आज की तिथि तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है।

वहीं दूसरी ओर, राज्य सरकार के वकील ने याचिका का यह कहते हुए विरोध किया कि याचिकाकर्ता ने संबंधित पुलिस थाना से संपर्क नहीं किया और बीएनएनएस की धारा 175(3) के तहत मजिस्ट्रेट से संपर्क किए बगैर सीधे उच्च न्यायालय का रुख किया।

पीठ ने एक सितंबर के अपने आदेश में कहा, ‘‘इस अदालत का विचार है कि यदि एक व्यक्ति को इस बात की पीड़ा है कि पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई या प्राथमिकी दर्ज कर ली गई, लेकिन उचित जांच नहीं की जा रही है तो उसे उच्च न्यायालय का रुख करने से पहले संबंधित मजिस्ट्रेट के पास जाना चाहिए।’’

भाषा सं राजेंद्र शफीक

शफीक