हैदराबाद, 19 जनवरी (भाषा) तेलंगाना उच्च न्यायालय ने सोमवार को कालेश्वरम परियोजना पर न्यायिक आयोग के निष्कर्षों के आधार पर राज्य सरकार द्वारा किसी भी प्रतिकूल कार्रवाई से बीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव, पूर्व मंत्री टी. हरीश राव और अन्य को दिए गए अंतरिम संरक्षण को 25 फरवरी तक बढ़ा दिया।
मुख्य न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह और न्यायमूर्ति जी.एम. मोहिउद्दीन की खंडपीठ ने मामले को 25 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दिया, ताकि लिखित दलीलें दाखिल की जा सकें। साथ ही पीठ ने पहले से दिये गए अंतरिम संरक्षण को बढ़ा दिया।
सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव, हरीश राव, पूर्व मुख्य सचिव शैलेंद्र कुमार जोशी और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी स्मिता सभरवाल द्वारा दायर रिट याचिकाओं की सुनवाई के बाद पीठ ने यह आदेश पारित किया। चंद्रशेखर को उनके समर्थक केसीआर बुलाते हैं।
पिछले साल 12 नवंबर को, उच्च न्यायालय ने रिपोर्ट के आधार पर केसीआर और अन्य लोगों को सुरक्षा प्रदान की थी और फिर मामले को 19 जनवरी (सोमवार) तक के लिए स्थगित कर दिया था, जिससे राज्य सरकार को जवाबी हलफनामे दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मिल गया था। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को इसके बाद उनका जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय भी दिया।
उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी.सी. घोष की अध्यक्षता वाले आयोग ने, जिसने बीआरएस कार्यकाल के दौरान कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना के निर्माण में कथित अनियमितताओं की जांच की थी, पहले ही सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी।
यह रिपोर्ट पिछले साल अगस्त में राज्य विधानसभा में पेश की गई थी और चर्चा के बाद, मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने जांच सीबीआई को सौंपने के सरकार के फैसले की घोषणा की थी।
अपनी रिपोर्ट में आयोग ने चंद्रशेखर राव को परियोजना के निर्माण और अन्य पहलुओं में कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार ठहराया। रिपोर्ट में बीआरएस शासन के दौरान सिंचाई मंत्री रहे केसीआर के रिश्तेदार हरीश राव के साथ-साथ बैराज और परियोजना के अन्य घटकों के निर्माण में कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
इस रिपोर्ट को चुनौती देते हुए केसीआर, हरीश राव और अन्य लोगों ने इसे रद्द करने का अनुरोध करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था।
भाषा प्रशांत मनीषा
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