दत्तक माताओं के लिए मातृत्व अवकाश संबंधी न्यायालय के आदेश का हितधारकों ने स्वागत किया

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दत्तक माताओं के लिए मातृत्व अवकाश संबंधी न्यायालय के आदेश का हितधारकों ने स्वागत किया

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  • Publish Date - March 18, 2026 / 09:21 PM IST,
    Updated On - March 18, 2026 / 09:21 PM IST

नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) दत्तक माताओं के लिए मातृत्व अवकाश संबंधी उच्चतम न्यायालय के आदेश का हितधारकों ने स्वागत किया है।

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा था कि बच्चे को गोद लेना प्रजनन स्वायत्तता के अधिकार का हिस्सा है और इसी के साथ उसने उस कानून को रद्द कर दिया था जिसमें कहा गया था कि किसी महिला को मातृत्व अवकाश तभी मिलेगा जब वह तीन महीने से कम आयु के बच्चे को कानूनी रूप से गोद ले।

न्यायालय ने कहा था कि गोद लेने वाली मां को बच्चे की उम्र की परवाह किए बिना 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलना चाहिए।

एक महिला के लिए अपनी एक दिन की गोद ली हुई बेटी के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाना मुश्किल हो रहा था क्योंकि उनके कार्यालय ने उन्हें मातृत्व अवकाश लेने की अनुमति नहीं दी थी।

यह नौ साल पहले की बात है। आज, रजनी शर्मा (बदला हुआ नाम) का मानना ​​है कि गोद लेने वाले माता-पिता को बच्चे के साथ शारीरिक और भावनात्मक रूप से जुड़ने के लिए काम से छुट्टी लेने का अधिकार होना चाहिए।

बाल अधिकार कार्यकर्ता एनाक्षी गांगुली ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का यह फैसला ‘आवश्यक और अनिवार्य’ था। उन्होंने तर्क दिया कि पितृत्व अवकाश पर भी चर्चा की जानी चाहिए।

न्यायालय ने केंद्र सरकार से पितृत्व अवकाश को सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में मान्यता देने के लिए कानून बनाने का आग्रह किया है।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के 22 जुलाई, 2009 के आदेश के अनुसार, एक पुरुष सरकारी कर्मचारी बच्चे को गोद लेने की तारीख से छह महीने के भीतर 15 दिनों का सवैतनिक पितृत्व अवकाश ले सकता है।

हालांकि, निजी कंपनियों में गोद लेने के मामले में पितृत्व अवकाश प्रदान करने के लिए वर्तमान में कोई समान कानून नहीं है।

भाषा

प्रचेता देवेंद्र

देवेंद्र