अदालत ने केंद्र को लाल किले पर आईएनए शहीदों के लिए स्मारक बनाने का निर्देश देने से इनकार किया

अदालत ने केंद्र को लाल किले पर आईएनए शहीदों के लिए स्मारक बनाने का निर्देश देने से इनकार किया

अदालत ने केंद्र को लाल किले पर आईएनए शहीदों के लिए स्मारक बनाने का निर्देश देने से इनकार किया
Modified Date: September 30, 2026 / 04:52 pm IST
Published Date: September 30, 2026 4:52 pm IST

नयी दिल्ली, 30 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्र को लाल किले पर आजाद हिंद फौज (आईएनए) के शहीदों के सम्मान में एक स्मारक बनाने का निर्देश देने से इनकार कर दिया।

‘महान स्वतंत्रता सेनानी ललती राम ट्रस्ट’ द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि स्मारक का निर्माण करना सरकारी अधिकारियों के विवेकाधिकार का विषय है और यह अदालत के समक्ष “न्यायसंगत मुद्दा” नहीं बन सकता।

पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा, “जो कुछ भी आपको अच्छा महसूस कराता है, वह रिट याचिका का विषय नहीं बन जाता। स्मारक बनाना या न बनाना सरकार का विवेकाधिकार है, अदालतों का नहीं। यह किसी न्यायालय के समक्ष बहस का मुद्दा नहीं हो सकता।”

याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि सरकार द्वारा लाल किले में आईएनए के हजारों शहीदों के लिए एक स्मारक बनाने की योजना की घोषणा किए हुए पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

उन्होंने कहा कि इस तरह की देरी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के साथ जीने के अधिकार का उल्लंघन करती है।

इस पर आदालत ने कहा, “किसी स्मारक का निर्माण किसी मौलिक कर्तव्य या अधिकार से जुड़ा नहीं है। हम ऐसा निर्देश कैसे पारित कर सकते हैं? हम सरकार को लाल किले में भूमि आवंटित करने का निर्देश कैसे दे सकते हैं?”

अदालत ने याचिकाकर्ता को केंद्र के समक्ष एक विस्तृत अभ्यावेदन देने की स्वतंत्रता देते हुए जनहित याचिका (पीआईएल) पर कार्यवाही बंद कर दी।

इसमें कहा गया कि यदि ऐसा कोई अभ्यावेदन दिया जाता है, तो अधिकारियों द्वारा उस पर निर्णय लिया जाएगा।

याचिका में कहा गया कि अगस्त 2021 में, केंद्र सरकार ने संसद में एक लिखित उत्तर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती समारोह के उपलक्ष्य में प्रस्तावों की घोषणा की थी, जिनमें आईएनए के शहीदों के लिए लाल किले में एक स्मारक स्थापित करना शामिल था।

भाषा प्रशांत मनीषा

मनीषा


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