लालू और परिवार के खिलाफ भूमि के बदले नौकरी घोटाले में अदालत नए सिरे से दलीलें सुनेगी

लालू और परिवार के खिलाफ भूमि के बदले नौकरी घोटाले में अदालत नए सिरे से दलीलें सुनेगी

लालू और परिवार के खिलाफ भूमि के बदले नौकरी घोटाले में अदालत नए सिरे से दलीलें सुनेगी
Modified Date: September 30, 2026 / 05:11 pm IST
Published Date: September 30, 2026 5:11 pm IST

नयी दिल्ली, 30 सितंबर (भाषा) दिल्ली की एक अदालत रेलवे में जमीन के बदले नौकरी से जुड़े धनशोधन मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता लालू प्रसाद यादव और अन्य के खिलाफ आरोपों पर दलीलें नए सिरे से सुनेगी।

विशेष न्यायाधीश प्रशांत कुमार ने बुधवार को कहा, ‘‘प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के वकील आरोप तय करने के बिंदु पर नए सिरे से दलीलें पेश करने के लिए कुछ समय मांग रहे हैं। आरोप तय करने के संबंध में दलीलों के लिए 14 अक्टूबर को मामला सूचीबद्ध किया जाए।’’

इससे पहले, विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के संबंध में आदेश सुरक्षित रख लिया था। ईडी ने इस साल 16 मार्च को आरोप तय करने के बिंदु पर अपनी दलीलें पूरी कर ली थीं।

बाद में न्यायाधीश गोगने का तबादला द्वारका अदालत में कर दिया गया। बुधवार को अदालत के कर्मचारियों ने सूचित किया कि न्यायाधीश का तबादला हो चुका है।

दिल्ली उच्च न्यायालय की ऑनलाइन सूचना प्रणाली के अनुसार, न्यायाधीश गोगने 22 सितंबर से कार्यरत रजिस्ट्रार हैं।

धनशोधन का यह मामला धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की आपराधिक धाराओं के तहत दर्ज किया गया और यह केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज शिकायत पर आधारित है।

इस साल नौ जनवरी को न्यायाधीश गोगने ने सीबीआई मामले में लालू प्रसाद, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों समेत 41 आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के आरोप तय करने का आदेश दिया था।

यह कथित धनशोधन घोटाला उस अवधि से संबंधित है, जब लालू प्रसाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग)-1 सरकार में रेल मंत्री थे।

ईडी ने अपने पहले आरोप-पत्र में तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री की पत्नी राबड़ी देवी, उनकी बेटियों मीसा भारती और हेमा यादव, यादव परिवार के कथित ‘करीबी सहयोगी’ अमित कात्याल, रेलवे के एक पूर्व कर्मचारी हृदयानंद चौधरी; और दो कंपनियों ‘ए. के. इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड’ तथा ‘ए बी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ को आरोपी बनाया था। इन दोनों कंपनियों का प्रतिनिधित्व उनके साझा निदेशक शरीकुल बारी के माध्यम से किया गया था।

बाद में लालू प्रसाद और उनके बेटों तेजस्वी यादव तथा तेज प्रताप को भी आरोपी बनाया गया।

आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच भारतीय रेलवे के विभिन्न जोन में कई लोगों को समूह ‘घ’ के पदों पर नियुक्त किया गया, जिसके बदले उन्होंने रिश्वत के तौर पर अपनी जमीन लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनी ‘ए के इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड’ को हस्तांतरित कर दी।

भाषा संतोष नरेश

नरेश


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