नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को उस जनहित याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत घर-घर जाकर गणना करने की प्रक्रिया के कारण बेघर लोगों के मताधिकार से वंचित रह जाने की आशंका जताई गई है।
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने इंदु प्रकाश सिंह की याचिका पर सुनवाई के बाद कहा, ‘‘हम आदेश पारित करेंगे।’’
याचिका में अधिकारियों को एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बेघर या विस्थापित लोगों के नाम मतदाता सूची में दर्ज करने या उन्हें सूची में बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
पीठ ने कहा कि यह अदालतों का काम नहीं, बल्कि निर्वाचन आयोग का दायित्व है कि वह ऐसा तंत्र विकसित करे जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि बेघर या तोड़फोड़ की कार्रवाई के कारण विस्थापित हुए लोग एसआईआर की प्रक्रिया से बाहर न रह जाएं।
अदालत ने कहा कि हर मामले का समाधान अदालतों पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
अदालत ने यह भी कहा कि जनहित याचिका में किसी ऐसे नागरिक का कोई विशिष्ट उदाहरण नहीं दिया गया है, जिसका नाम इस प्रक्रिया के कारण छूट गया हो।
पीठ ने कहा, ‘‘आपको ऐसे विशिष्ट व्यक्तियों की ओर इशारा करना होगा, जिन्हें इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है। सब कुछ आपकी अपनी धारणा पर आधारित है।’’
निर्वाचन आयोग के वकील ने अदालत में कहा कि आयोग बिना पते वाले लोगों के मताधिकार से वंचित होने की आशंका से अवगत है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए पहले से ही एक प्रक्रिया निर्धारित है।
हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने इस दावे का विरोध किया।
पीठ ने कहा, ‘‘हमसे इन मुद्दों पर फैसला करने के लिए न कहें। यह उनका काम है कि वे तय करें कि इस प्रक्रिया को संचालित करने का अधिक उपयुक्त तरीका क्या हो। हर बात अदालतों पर नहीं छोड़ सकते।’’
याचिका में कहा गया है कि दिल्ली में लगभग तीन लाख बेघर लोग हैं और एसआईआर के लिए निर्वाचन आयोग की घर-घर जाकर गणना करने की प्रक्रिया उनके लिए एक ‘‘संरचनात्मक बाधा’’ है।
जनहित याचिका में कहा गया, ‘‘निर्वाचन आयोग के 14 मई 2026 के निर्देश संख्या 23/2025-ईआरएस (खंड-2) के तहत दिल्ली में जारी एसआईआर प्रक्रिया इस धारणा पर आधारित है कि बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ) मतदाता सूची में दर्ज पतों पर जाकर मतदाताओं की पहचान और उनकी मौजूदगी की पुष्टि कर सकेंगे।’’
याचिका में यह भी कहा गया है कि पहले से बेघर, हाल में बेघर हुए या तोड़फोड़ की कार्रवाई की वजह से इस प्रक्रिया के कारण विस्थापित लोगों के मतदाता सूची से बाहर रह जाने और इसके परिणामस्वरूप उनके मताधिकार से वंचित होने का खतरा है।
याचिका के अनुसार, इससे न केवल उनके मताधिकार का उल्लंघन हो सकता है, बल्कि भविष्य में उनकी नागरिकता पर भी सवाल उठने की आशंका है।
भाषा खारी देवेंद्र
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