अदालत ने एसआईआर के लिए स्कूल शिक्षकों की तैनाती से जुड़ी याचिका पर ईसी से जवाब मांगा

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अदालत ने एसआईआर के लिए स्कूल शिक्षकों की तैनाती से जुड़ी याचिका पर ईसी से जवाब मांगा

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  • Publish Date - July 24, 2026 / 04:51 PM IST,
    Updated On - July 24, 2026 / 04:51 PM IST

नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने उस जनहित याचिका पर निर्वाचन आयोग से शुक्रवार को जवाब मांगा जिसमें यहां जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को ‘‘बड़ी संख्या में’’ बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) और गणना कर्मियों के रूप में तैनात किए जाने पर चिंता जताई गई है।

मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने निर्वाचन आयोग (ईसी) से कहा कि वह अधिवक्ताओं राजेश कुमार गोगना और अशोक अग्रवाल द्वारा दायर जनहित याचिका के जवाब में एक संक्षिप्त हलफनामा दाखिल करे।

याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि क्या आयोग सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए बीएलओ और गणना कर्मियों के रूप में काम करना अनिवार्य कर सकता है।

निर्वाचन आयोग के वकील ने कहा कि एसआईआर पूरे देश में चलाया जाने वाला एक अभियान है और सरकारी शिक्षकों को केवल गैर-शैक्षणिक समय या छुट्टियों के दौरान ही काम करना होता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों को इसके लिए पारिश्रमिक और मानदेय दिया जाता है तथा एसआईआर प्रक्रिया के लिए अंततः ‘‘केवल 10-14 प्रतिशत शिक्षकों को ही बुलाया जाता है’’।

आयोग के वकील ने कहा, ‘‘यदि नौ शिक्षकों की मांग की जाती है, तो स्कूल केवल 3-4 शिक्षकों को ही भेजता है। मुझे चार शिक्षकों के आने से कोई आपत्ति नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि आयोग ऐसे मामलों में ‘‘उदार’’ दृष्टिकोण अपनाता है।

अदालत ने कहा कि यदि निर्वाचन आयोग के वकील यह बयान दे देते हैं कि शिक्षकों की भागीदारी स्वैच्छिक होगी और यह किसी भी तरह अनिवार्य नहीं होगी, तो वह जनहित याचिका का निपटारा कर देगी।

पीठ ने मौखिक रूप से कहा, ‘‘क्या शिक्षकों की भागीदारी को अनिवार्य बनाया जा सकता है? कोई व्यक्ति आपके मानदेय या मुआवजे में रुचि नहीं रखता। उन्हें आराम की जरूरत होती है। यह स्वैच्छिक होना चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 324 का सहारा लेकर आप जो मर्जी चाहें, वह नहीं कर सकते।’’

अदालत ने कहा, ‘‘यदि आप उन्हें स्वयंसेवी कह रहे हैं, तो ऐसा बयान दे दीजिए। हम इस याचिका का निपटारा कर देंगे।’’

अदालत ने साथ ही कहा कि शिक्षक निर्वाचन आयोग के कर्मचारी नहीं हैं और आयोग के निर्देशों का पालन करने से इनकार करना दंडनीय अपराध है।

अदालत ने निर्वाचन आयोग से सोमवार तक अपना पक्ष रखते हुए एक ‘‘संक्षिप्त हलफनामा’’ दाखिल करने को कहा और जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए 28 जुलाई की तारीख तय कर दी।

वर्तमान याचिका जनहित में दिल्ली के सरकारी, नगर निगम और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों के संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 21ए के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए दायर की गई है। इन स्कूलों के शिक्षकों को एसआईआर के लिए बड़ी संख्या में बूथ स्तर अधिकारियों और गणना कर्मचारियों के रूप में तैनात किया गया है।

जनहित याचिका में दावा किया गया है कि कई स्कूलों में शिक्षण अवधि के दौरान सभी नियमित शिक्षकों को हटा लिया गया है, जिसके कारण कक्षाएं या तो अतिथि शिक्षकों या फिर ऐसे शिक्षकों द्वारा संचालित की जा रही हैं, जो संबंधित विषय के शिक्षक नहीं हैं।

याचिका में अधिकारियों को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे स्कूल शिक्षकों की तैनाती को ‘‘तर्कसंगत’’ बनाएं, इसे अधिकतम 10 प्रतिशत तक सीमित करें।

इसमें अधिकारियों को यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि वे एसआईआर प्रक्रिया के लिए पहले उपलब्ध गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों का इस्तेमाल करें।

भाषा

देवेंद्र नरेश

नरेश