अदालत ने ‘फर्जी’ छात्र मामले में स्कूल के अधिकारियों को चार साल की सजा सुनाई

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अदालत ने ‘फर्जी’ छात्र मामले में स्कूल के अधिकारियों को चार साल की सजा सुनाई

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  • Publish Date - July 28, 2026 / 12:05 PM IST,
    Updated On - July 28, 2026 / 12:05 PM IST

रानीपेट (तमिलनाडु), 28 जुलाई (भाषा) तमिलनाडु के रानीपेट की एक अदालत ने सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल के प्रशासनिक अधिकारी और प्रधानाध्यापिका को रिकॉर्ड में हेराफेरी कर 187 ‘फर्जी’ छात्रों का नाम दर्ज करने और सरकारी धन हड़पने के मामले में चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) की ओर से मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, दोषी ठहराए गए लोगों में वित्व रत्ना विला सरकारी सहायता प्राप्त प्राथमिक विद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी करुणागरा संजीव दॉस और प्रधानाध्यापिका ऐलिस ताबिता विजय कुमारी शामिल हैं। अदालत ने दोनों पर क्रमशः 35,000 रुपये और 40,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

धन की हेराफेरी का यह मामला 27 अगस्त 2012 को उस समय सामने आया जब डीवीएसी, वेल्लोर डिटैचमेंट और निरीक्षण प्रकोष्ठ के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से औचक निरीक्षण किया।

जांच में पता चला कि स्कूल में वास्तविक छात्रों की संख्या काफी कम थी, लेकिन आधिकारिक रजिस्टरों में हेरफेर कर छात्रों की संख्या बढ़ाकर 259 दर्शाई गई थी।

रजिस्टर में 187 फर्जी छात्रों के नाम जोड़कर दोनों आरोपियों ने अवैध रूप से छह अतिरिक्त शिक्षण पदों की मंजूरी हासिल कर ली।

उन्होंने गलत तरीके से सरकारी लाभ प्राप्त किए, जिनमें फर्जी कर्मचारियों के वेतन के लिए 4,67,121 रुपये और मध्याह्न भोजन योजना के लिए 2,762 रुपये शामिल थे। इससे सरकारी खजाने को कुल 4.69 लाख रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान हुआ।

विस्तृत जांच के बाद डीवीएसी ने रानीपेट की अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।

अदालत ने 27 जुलाई 2026 को फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों को आपराधिक कदाचार और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का दोषी पाया और सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए दोनों को चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

भाषा शोभना वैभव

वैभव