नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2016 में 15 वर्षीय अपनी छात्रा से बलात्कार करने और उसे गर्भवती करने के लिए एक शिक्षक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार ने उस व्यक्ति के खिलाफ सजा पर बहस की सुनवाई की जो अपराध के समय 46 वर्ष का था।
उस व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत बलात्कार और यौन अपराधों के खिलाफ बच्चों के संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) के तहत गंभीर यौन उत्पीड़न के लिए दोषी ठहराया गया था।
विशेष सरकारी अभियोजक आशीष काजल ने ‘निवारक सजा’ की मांग करते हुए तर्क दिया कि दोषी स्कूल में नाबालिग पीड़िता का अभिभावक होने के अलावा शिक्षण जैसे नेक पेशे में था।
अदालत ने सात मई को पारित आदेश में कहा, ‘‘दोषी राजीव ने स्कूल शिक्षक होने के बावजूद स्कूल में पीड़िता का बार-बार बलात्कार/गंभीर प्रवेशात्मक यौन उत्पीड़न किया और इस कृत्य के कारण नाबालिग गर्भवती हो गई और उसने एक बच्चे को जन्म दिया।’’
अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि उस पर वासना इस हद तक हावी हो गई थी कि उसने पीड़िता के प्रति अपराध को अंजाम दे दिया।
आजीवन कारावास का अर्थ है कि अपराधी को अपना शेष जीवन जेल में बिताना पड़ेगा। यह देखते हुए कि पीड़िता की अपराध के कुछ साल बाद मृत्यु हो गई थी, न्यायाधीश ने उसकी मां को 16.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
भाषा संतोष रंजन
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