अदालत ने सफदरजंग अस्पताल से सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट और हेल्थ बुलेटिन तलब किया

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अदालत ने सफदरजंग अस्पताल से सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट और हेल्थ बुलेटिन तलब किया

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  • Publish Date - July 20, 2026 / 06:31 PM IST,
    Updated On - July 20, 2026 / 06:31 PM IST

नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को सफदरजंग अस्पताल से सोनम वांगचुक की जांच रिपोर्ट और स्वास्थ्य बुलेटिन जमा करने को कहा। साथ ही, अदालत ने कहा कि वह मंगलवार को भूख हड़ताल कर रहे जलवायु कार्यकर्ता की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो की उस याचिका पर फैसला करेगी, जिसमें उन्हें किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया है।

पीठ सफदरजंग अस्पताल में वांगचुक के हो रहे इलाज में दखल देने से इनकार करने संबंधी एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देने वाली आंग्मो की अपील पर सुनवाई करने के लिए सोमवार को सहमत हो गयी।

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा, “रिपोर्ट में आज के नमूनों का विश्लेषण शामिल होना चाहिए।”

अदालत ने कहा कि वह मंगलवार को इस बात पर फैसला करेगी कि वांगचुक को किसी निजी अस्पताल में ले जाने के लिए आंग्मो की अर्जी को मंजूरी दी जाए या नहीं।

आंग्मो ने एकल न्यायाधीश के रविवार के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें सफदरजंग अस्पताल में वांगचुक के जारी इलाज में दखल देने से इनकार कर दिया गया था।

पीठ ने एम्स के प्रभारी निदेशक और वांगचुक का इलाज कर रहे एम्स के आपातकालीन विभाग में तैनात चिकित्सक को सुनवाई में मौजूद रहने के लिए कहा, और उन डॉक्टर को भी मौजूद रहने का निर्देश दिया जो पहले उनका इलाज कर रहे थे।

इसमें आंग्मो से वांगचुक के रक्त विश्लेषण की रिपोर्ट भी जमा करने को कहा गया, क्योंकि ऐसा बताया गया था कि ये जांच उनके ही कहने पर एक निजी लैब में की गयी थी।

इससे पहले, आंग्मो की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील द्वारा मामले का जिक्र किए जाने के बाद पीठ ने इसे तत्काल सुनने पर सहमति जताई।

आंग्मो ने अपनी अपील में कहा है कि एकल न्यायाधीश का रविवार का आदेश बिना किसी गिरफ्तारी के ही वांगचुक को अवैध रूप से सफदरजंग अस्पताल में रहने के लिए बाध्य करता है और यह निर्देश देता है कि न तो वांगचुक, न ही उनकी पत्नी के पास उनके चिकित्सीय उपचार से संबंधित निर्णय लेने का अंतिम अधिकार है।

अपील में यह भी कहा गया है कि आदेश में ‘सूचित सहमति’ और किसी व्यक्ति के अपने उपचार को स्वीकार करने या उससे इनकार करने के मौलिक अधिकार पर विचार नहीं किया गया है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने रविवार को वांगचुक के सफदरजंग अस्पताल में जारी इलाज के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।

रविवार को विशेष सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने कहा कि सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सक वांगचुक के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी कर रहे हैं और ऐसा नहीं कहा जा सकता कि उनके साथ किसी प्रकार की जबरदस्ती की जा रही है।

एकल न्यायाधीश की राय थी कि इस चरण पर कार्यकर्ता को तुरंत दूसरी जगह भेजने के लिए किसी अंतरिम आदेश की जरूरत नहीं है।

यह टिप्पणी आंग्मो की उस याचिका पर आई, जिसमें उन्हें किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की इजाजत मांगी गई थी।

दिल्ली उच्च न्यायालय के 16 जुलाई के उस आदेश का उल्लेख करते हुए, जिसमें अधिकारियों को वांगचुक के स्वास्थ्य की निगरानी करने और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सीय हस्तक्षेप करने का निर्देश दिया गया था, न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने कहा था कि चूंकि वांगचुक स्वयं किसी अस्पताल में भर्ती नहीं हुए थे, इसलिए उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सरकार का उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाना उसके अधिकार क्षेत्र में था।

अदालत ने कहा था, ‘‘चूंकि सरकार ने सोनम वांगचुक की चिकित्सीय स्थिति को देखते हुए उन्हें अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया है, इसलिए अदालत इसे मनमानी कार्रवाई नहीं मानती।’’

सोनम वांगचुक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में जारी प्रदर्शन के समर्थन में 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।

भाषा प्रशांत सुरेश

सुरेश

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