न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों से निपटने के लिए अदालतों का बनाया तंत्र ‘मजबूत’ : सीजेआई सूर्यकांत

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न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों से निपटने के लिए अदालतों का बनाया तंत्र ‘मजबूत’ : सीजेआई सूर्यकांत

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  • Publish Date - September 15, 2026 / 12:48 AM IST,
    Updated On - September 15, 2026 / 12:48 AM IST

नयी दिल्ली, 14 सितंबर (भाषा) प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों से निपटने के लिए शीर्ष अदालत और उच्च न्यायालयों की ओर से विकसित तंत्र “मजबूत”, “बेहद प्रभावी” और समय पर कार्रवाई करने वाला है।

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित छठे राम जेठमलानी स्मृति व्याख्यान में ‘न्याय होता हुआ दिखना चाहिए : कानूनी व्यवस्था के आधार के तौर पर पारदर्शिता और जनता का भरोसा” विषय पर मुख्य भाषण देते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि सुधार ही नियम होना चाहिए और कोई भी संस्था एक ही स्थिति में बने रहकर न तो टिक सकती है और न ही उस पर गर्व कर सकती है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “मैं केवल इतना कहना चाहता हूं कि अन्य प्रशासनिक सुधारों के संबंध में, खासकर शिकायतों से जिस तरह निपटा जा रहा है, भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि शीर्ष अदालत और उच्च न्यायालयों ने जो तंत्र विकसित किया है, वह मजबूत, बेहद प्रभावी और समय पर कार्यवाई करने वाला है।”

उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी और हरीश साल्वे, जिन्होंने इस कार्यक्रम में भी अपने विचार रखे, ने प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कुछ ऐसे सवाल उठाए हैं, जो “सार्वजनिक महत्व के अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न” हैं।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि किसी भी संस्था को समय-समय पर प्रशासनिक सुधारों की आवश्यकता हो सकती है और न्यायपालिका भी इसका अपवाद नहीं है।

जेठमलानी ने अपने संबोधन में उस विवाद का जिक्र किया था, जो पिछले साल दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर नकदी मिलने के आरोपों से जुड़ा था।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, “हम बिना किसी हिचकिचाहट के स्वीकार करते हैं कि सुधार ही नियम होना चाहिए। कोई भी संस्था एक ही स्थिति में बने रहकर न तो टिक सकती है और न ही उस पर गर्व कर सकती है। लेकिन कुछ ऐसे मुद्दे भी होते हैं, जिन पर सार्वजनिक मंच से प्रतिक्रिया देना सही नहीं होता।”

उन्होंने कहा कि कोई न्यायाधीश, चाहे वह अंतरिम आदेश दे रहा हो या अंतिम फैसला, हर चरण पर शिकायत को आमंत्रित करेगा।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, “…यह बहुत ही गंभीर और बहस वाला मुद्दा है कि क्या उन सभी शिकायतों को किसी मंच या वेबसाइट पर लाया जाना चाहिए, या फिर कोई बहुत मजबूत आंतरिक तंत्र होना चाहिए, जो पूरी निष्पक्षता, बिना किसी पूर्वाग्रह और बहुत जिम्मेदारी के साथ उन शिकायतों को निपटाए।”

उन्होंने कहा, “मैं भरोसा दिला सकता हूं कि ऐसा तंत्र अच्छी तरह से स्थापित है, लेकिन इसमें हमेशा सुधार और गुणवत्ता में बेहतरी की गुंजाइश लगातार बनी रहती है।”

भाषा पारुल गोला

गोला