भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय समिति के सदस्य ने आत्मसमर्पण किया
भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय समिति के सदस्य ने आत्मसमर्पण किया
हैदराबाद, 26 मई (भाषा) प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी (भाकपा-माओवादी) को एक और बड़ा झटका देते हुए इसकी केंद्रीय समिति के सदस्य पी. नरहरि उर्फ विश्वनाथ ने मंगलवार को हैदराबाद में तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सी.वी. आनंद के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
भाकपा (माओवादी) की बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी (बीजेएसएसी) के सचिव नरहरि (64) की पत्नी और राज्य समिति की सदस्य मेदारा दानम्मा ने भी पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया जिसे लता के नाम से भी जाना जाता है।
नरहरि का जन्म तेलंगाना के सोमिदी गांव में हुआ था जो काजीपेट मंडल के अंतर्गत आता है।
आनंद ने पत्रकारों से कहा, “आज दो शीर्ष नेताओं नरहरि और दानम्मा का आत्मसमर्पण करना भाकपा (माओवादी) के लिए बड़ा झटका है। इसके साथ ही संगठन का अंतिम बचा हुआ ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो (ईआरबी) भी लगभग खात्मे की कगार पर दिखाई दे रहा है।”
डीजीपी ने बताया कि नरहरि और उसकी पत्नी डेंगू और मलेरिया से पीड़ित थे।
तेलंगाना पुलिस पिछले 10 दिन से हैदराबाद के एक अस्पताल में उनका इलाज करवा रही थी।
वारंगल में स्नातक की पढ़ाई के दौरान वह रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन (आरएसयू) की विचारधारा से प्रभावित हुआ और 1982 में ‘पीपुल्स वॉर ग्रुप’ में शामिल होने के बाद भूमिगत हो गया।
उसने भाकपा (माओवादी) में विभिन्न भूमिकाओं में काम किया जिसमें 2006 में बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी का सदस्य होना भी शामिल है। उसे 2017 में केंद्रीय समिति में शामिल किया गया।
नरहरि ने आग्नेयास्त्र, मोर्टार और रॉकेट चालित ग्रेनेड बनाने में महारत हासिल की थी। इसके अलावा वह ‘बूबी ट्रैप’ लगाने, ‘क्लेमोर माइंस’ और ‘लैंडमाइंस’ बिछाने में भी माहिर था।
आनंद ने बताया कि वह संगठन के सदस्यों को हथियारों के निर्माण, मरम्मत व रखरखाव का प्रशिक्षण भी देता था।
आंध्र प्रदेश की निवासी दानम्मा ने 1988 में नरहरि से विवाह किया और झारखंड में उसके साथ काम किया।
दानम्मा को 2004 में नागपुर में गिरफ्तार किया गया था और उसने सात साल जेल में बिताए।
जमानत मिलने के बाद वह फिर भूमिगत हो गई और 2018 में बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी की सदस्य बनी।
आनंद ने बताया कि 2024 से अब तक 822 माओवादियों ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है।
तेलंगाना सरकार की पुनर्वास नीति के तहत नरहरि को 25 लाख रुपये और दानम्मा को 20 लाख रुपये की इनामी राशि डिमांड ड्राफ्ट के जरिए सौंपी गई।
डीजीपी ने कहा कि इस वर्ष अब तक तेलंगाना में कुल 264 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है।
आनंद ने बताया कि फिलहाल तेलंगाना के केवल तीन सक्रिय भूमिगत सदस्य राज्य से बाहर भाकपा (माओवादी) की विभिन्न इकाइयों में काम कर रहे हैं, जिनमें से एक केंद्रीय समिति सदस्य मुप्पला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति है।
भाषा जोहेब नरेश
नरेश

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