भाकपा (माले) ने खरगे को पत्र लिखा, झारखंड में ‘क्रॉस वोटिंग’ के आरोपों पर विरोध दर्ज कराया

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भाकपा (माले) ने खरगे को पत्र लिखा, झारखंड में 'क्रॉस वोटिंग' के आरोपों पर विरोध दर्ज कराया

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  • Publish Date - June 19, 2026 / 02:55 PM IST,
    Updated On - June 19, 2026 / 02:55 PM IST

नयी दिल्ली, 19 जून (भाषा) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने झारखंड में राज्यसभा चुनाव में ‘क्रॉस-वोटिंग’ के कांग्रेस के आरोपों को लेकर शुक्रवार को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर विरोध दर्ज कराया और कहा कि वह नेताओं को निर्देश दें कि वे बिना किसी सत्यापन के सहयोगी दलों पर इस प्रकार के निराधार और अनुचित आरोप लगाना बंद करें।

उन्होंने कहा कि इस तरह के निराधार आरोपों से ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक दलों के बीच आपसी विश्वास कमजोर होता है।

कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू ने बृहस्पतिवार को झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और भाकपा (माले) लिबरेशन को कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया था कि दोनों दलों ने झा के पक्ष में मतदान नहीं किया।

भट्टाचार्य ने खरगे को लिखे पत्र में कहा, ‘यह देखकर हमें गहरा आघात पहुंचा है कि कांग्रेस 18 जून को झारखंड से हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की हार के लिए हमारे विधायकों को दोषी ठहरा रही है। यह पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण और निराधार झूठ है।’

उन्होंने कहा, ‘हमारे दोनों विधायकों ने विपक्षी विधायकों की बैठक में तय योजना के अनुसार झा के पक्ष में मतदान किया। मतदान से पहले हमारे पोलिंग एजेंटों ने विधिवत मतपत्रों का सत्यापन भी किया था।’

उनका कहना है, ‘मैं आपको यह पत्र लिखकर हमारे विधायकों के विरुद्ध फैलाए जा रहे इस पूर्णतः निराधार और दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार तथा हमारी पार्टी की छवि धूमिल करने के प्रयास के प्रति अपना कड़ा विरोध दर्ज कराना चाहता हूं।’

भट्टाचार्य ने कहा, ‘आप भली-भांति जानते हैं कि बिहार और झारखंड में हुए राज्यसभा चुनाव में हमारी पार्टी के विधायक लगातार विपक्षी उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करते रहे हैं। साथ ही, यह भी सर्वविदित है कि हमारी पार्टी इंडिया गठबंधन के गठन के समय से ही उसकी सबसे प्रतिबद्ध सहयोगी पार्टियों में से एक रही है।’

उन्होंने खरगे से आग्रह किया कि कांग्रेस के नेताओं को निर्देश दें कि वे बिना किसी सत्यापन के सहयोगी दलों पर इस प्रकार के निराधार और अनुचित आरोप लगाना बंद करें, क्योंकि इससे इंडिया गठबंधन के घटक दलों के बीच आपसी विश्वास कमजोर होता है।

उन्होंने कहा, ‘इस दुर्भावनापूर्ण झूठ को मीडिया में व्यापक प्रचार मिला है, इसलिए हम विवश होकर इस पत्र को सार्वजनिक करने का निर्णय ले रहे हैं।’

भाषा हक मनीषा

मनीषा