तिरुवनंतपुरम, 19 जून (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने शुक्रवार को संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार के पहले बजट की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि यह महत्वाकांक्षी वादों पर आधारित है, लेकिन क्रियान्वयन और संसाधन जुटाने को लेकर इसमें कोई स्पष्ट रूपरेखा नहीं है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि बजट में कई बड़ी घोषणाएं की गई हैं, लेकिन सरकार इन प्रस्तावित परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं के लिए धन की व्यवस्था किस तरह करेगी, इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केरल पहले से ही 5.07 लाख करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है और सवाल उठाया कि नई पहलों के लिए राज्य सरकार धन की व्यवस्था कैसे करेगी।
चंद्रशेखर ने दावा किया कि विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा किए गए पांच ‘इंदिरा गारंटी’ वादों में से तीन का बजट में सार्थक रूप से कोई उल्लेख नहीं दिखाई देता है।
उन्होंने हर परिवार को 25 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा देने के वादे का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इस योजना के लिए केवल 10 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘केरल में लगभग 90 लाख परिवारों के हिसाब से यह प्रति परिवार लगभग 11 रुपये बैठता है। कांग्रेस सरकार ने लोगों को धोखा दिया है।’
भाजपा नेता ने दावा किया कि कल्याण पेंशन को बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह करने का सरकार का वादा पूरा नहीं हुआ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं के लिए प्रस्तावित पांच लाख रुपये तक की ऋण योजना सिर्फ वादा बनकर रह गई है।
चन्द्रशेखर के मुताबिक, कभी लागू नहीं किये जाने वाले वादे करना कांग्रेस की राजनीति की पहचान बन गई है।
नेमोम विधायक ने बजट के माध्यम से बड़े पैमाने पर सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों और राज्य संपत्तियों के निजीकरण को बढ़ावा देने के प्रयासों की भी आलोचना की।
उन्होंने कहा, ‘केरल के लोगों को राजकोषीय अनुशासन, भ्रष्टाचार मुक्त शासन और वास्तविक विकास की जरूरत है, न कि राजनीतिक कल्पनाओं की।’
चंद्रशेखर ने कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) दोनों पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार ने राज्य की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया था और दोनों मोर्चे अब शासन के प्रति समान दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करते हैं।
भाजपा विधायक बी.बी. गोपकुमार ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सरकार बदलने के बावजूद दोनों प्रमुख राजनीतिक गठबंधनों की नीतियों और आर्थिक नजरिए में बहुत कम अंतर है।
भाषा तान्या संतोष
संतोष