भ्रष्टाचार के मामले में डीजीएचएस के पूर्व अधिकारी गिरफ्तार

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भ्रष्टाचार के मामले में डीजीएचएस के पूर्व अधिकारी गिरफ्तार

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  • Publish Date - June 19, 2026 / 04:56 PM IST,
    Updated On - June 19, 2026 / 04:56 PM IST

नयी दिल्ली, 19 जून (भाषा) दिल्ली में दवाइयों और अन्य सामान की खरीद से संबंधित भ्रष्टाचार के एक मामले में स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय से पूर्व में जुड़े रहे वरिष्ठ अधिकारी डॉ विनोद कुमार रंगा को गिरफ्तार किया गया। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

भ्रष्टाचार-रोधी शाखा (एसीबी) के बयान के मुताबिक, यह गिरफ्तारी केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) द्वारा दवाइयों, सर्जिकल सामान, इस्तेमाल होने वाली चीजों और मेडिकल उपकरणों की खरीद में बड़े पैमाने पर हुई कथित गड़बड़ियों की जांच के बाद की गई है।

डॉ. रंगा सीपीए के पूर्व विभागाध्यक्ष हैं।

बयान में कहा गया है, ‘सतर्कता निदेशालय की एक शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कुछ सरकारी कर्मचारियों और कुछ अन्य लोगों ने आपराधिक साजिश रची और चुनिंदा कंपनियों एवं आपूर्तिकर्ताओं को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए खरीद की प्रक्रियाओं, टेंडर की शर्तों और तकनीकी विनिर्देश में बदलाव किया, जिससे सरकारी खजाने का नुकसान हुआ और निजी स्तर पर काम करने वाले लोगों को गलत तरीके से लाभ मिला।’

जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया कि अनियमितताएं पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों, चादर एवं संबंधित कपड़े, सी-आर्म रेडियोलॉजिकल उपकरणों, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन, ओआरएस, शल्य चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री तथा दवाओं की अत्यधिक बढ़ी हुई कीमतों पर खरीद से संबंधित थीं।

यह भी आरोप लगाया गया कि चुनिंदा आपूर्तिकर्ताओं को लाभ पहुंचाने के लिए उनकी जरूरत के अनुरूप विनिर्देश तैयार किए गए, वास्तविक प्रतिस्पर्धियों को निविदा प्रक्रिया से बाहर रखा गया और सरकारी धन की सैकड़ों करोड़ रुपये की राशि का दुरुपयोग किया गया।

बयान में कहा गया, ‘शिकायत के आधार पर एसीबी ने दो जून को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच के दौरान अधिकारियों ने खरीद संबंधी अभिलेखों, आधिकारिक दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच की।’

जांच में सामने आया कि जांच के दायरे में आने वाली खरीद से संबंधित कई महत्वपूर्ण फाइलें कथित तौर पर डॉ रंगा ने उपलब्ध नहीं कराईं, जिन्हें उन्होंने अपने कब्जे में रखा हुआ था।

एसीबी ने कहा कि जांच के दौरान डॉ. रंगा से पूछताछ की गई, लेकिन वह लापता अभिलेखों और मामले के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के संबंध में संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में विफल रहे।

एसीबी ने डॉ. रंगा को बृहस्पतिवार को गिरफ्तार किया था और उन्हें शुक्रवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

अधिकारियों ने कहा, ‘साजिश में शामिल अन्य लोकसेवकों, व्यक्तियों, आपूर्तिकर्ताओं और लाभार्थियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।’

भाषा राखी माधव

माधव