तेजी से बदलते विश्व में महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा: मोदी

तेजी से बदलते विश्व में महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा: मोदी

तेजी से बदलते विश्व में महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा: मोदी
Modified Date: January 12, 2026 / 10:23 pm IST
Published Date: January 12, 2026 10:23 pm IST

गांधीनगर, 12 जनवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और मशीनरी पर निर्भरता को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया के लिए विश्वसनीय और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना भारत और जर्मनी की ‘‘साझी जिम्मेदारी’’ है।

मोदी ने गांधीनगर के महात्मा मंदिर कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘भारत-जर्मनी सीईओ फोरम’ को संबोधित किया। इस अवसर पर जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भी उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच साझेदारी साझा मूल्यों और आपसी विश्वास की नींव पर निर्मित एक निर्बाध साझेदारी है।

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प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘दुनिया तेजी से बदल रही है। हम देख रहे हैं कि किस प्रकार महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और पूंजीवादी तंत्र पर निर्भरता को आज हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। स्वामी विवेकानंद की जयंती के पावन अवसर पर हमें उनके विचारों और संदेश से प्रेरणा लेनी चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘उनका संदेश स्पष्ट था कि एक सशक्त राष्ट्र वही होता है, जो आत्मबल, आत्मनिर्भरता और जिम्मेदारी के साथ दुनिया से जुड़ता है। आज के वैश्विक संदर्भ में ये संदेश और भी प्रासंगिक है। इसी सोच के अनुरूप हमारा साझा दायित्व है कि हम दुनिया के लिए विश्वसनीय और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करें, और इस प्रयास से भारत और जर्मनी जैसे भरोसमंद साझेदारों की साझेदारी निर्णायक भूमिका निभाती है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच व्यापार 50 अरब अमेरिकी डॉलर का आंकड़ा पार कर चुका है।

उन्होंने कहा कि चांसलर का एशिया की अपनी पहली यात्रा में भारत आने का निर्णय जर्मनी की विविधीकरण की रणनीति में भारत की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है।

मोदी ने कहा, ‘‘आज हमने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। सबसे पहले हमने तय किया है कि इस निर्बाध आर्थिक साझेदारी को असीम बनाया जाए। यानी, पारंपरिक आर्थिक क्षेत्र के साथ-साथ अब रणनीतिक क्षेत्रों को भी मजबूत सहयोग मिलेगा। रक्षा क्षेत्र में आज हम संयुक्त मंतव्य पत्र का आदान-प्रदान कर रहे हैं। इससे रक्षा क्षेत्र में सह-नवाचार और सह-उत्पादन के लिए हमारी कंपनियों को स्पष्ट नीतिगत समर्थन मिलेगा।’’

उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी ‘विश्वसनीय साझेदारी’ को ‘तकनीकी साझेदारी’ में बदलने पर सहमत हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाएं महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में अपना सहयोग और बढ़ाएंगी।

उन्होंने कहा, ‘‘हम सेमीकंडक्टर क्षेत्र में पारस्परिक साझेदार हैं। बिजली, इलेक्ट्रॉनिक्स, बायोटेक, फिनटेक, फार्मास्यूटिकल्स, क्वांटम कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी अपार संभावनाएं हैं। इसके अलावा, हमें पूरी तरह से स्पष्ट है कि भारत-जर्मनी साझेदारी न केवल पारस्परिक रूप से लाभकारी है, बल्कि विश्व के लिए भी बेहतर है।’’

प्रधानमंत्री ने मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) को इससे अवगत कराया कि भारत हरित हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और जैव ईंधन के क्षेत्र में विश्व का अग्रणी देश बनने की ओर अग्रसर है।

मोदी ने कहा, ‘‘इससे सौर सेल, इलेक्ट्रोलाइसिस, बैटरी और पवन चक्की जैसे क्षेत्रों में जर्मन कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण विनिर्माण अवसर उत्पन्न होते हैं। भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के लिए एक व्यापक दृष्टि है। जब जर्मन पारिस्थितिकी तंत्र इससे जुड़ता है, तो हम मानव-केंद्रित डिजिटल भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं।’’

उन्होंने जर्मन कंपनियों से भारत की प्रतिभा का पूरा उपयोग करने का आग्रह किया और कहा कि भारत की प्रतिभा जर्मन उद्योग में नवाचार और उत्पादकता को बढ़ावा देने में सक्षम है।

मोदी ने कहा कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बावजूद, निरंतर और व्यापक सुधारों के कारण भारत 8 प्रतिशत से अधिक की विकास दर से आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि यह किसी एक कारण से नहीं, बल्कि निरंतर और व्यापक सुधारों के कारण संभव हुआ है।

मोदी ने कहा, ‘‘निजी क्षेत्र को हर क्षेत्र में बढ़ावा दिया जा रहा है, चाहे वह रक्षा हो या अंतरिक्ष, खनन हो या परमाणु ऊर्जा। अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं को लगातार कम किया जा रहा है। व्यापार करने में आसानी बढ़ रही है।’’

उन्होंने कहा कि इन प्रयासों ने भारत को आज दुनिया के लिए विकास और आशावाद का प्रतीक बना दिया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता भी जल्द ही अंतिम रूप ले लेगा, जिससे व्यापार, निवेश और साझेदारी के लिए एक नया अध्याय खुलेगा। उन्होंने कहा, ‘दूसरे शब्दों में कहें तो, आपके लिए रास्ता साफ है।’

उन्होंने जर्मनी की सटीकता और नवाचार को भारत की विशालता और गति के साथ मिलकर काम करने का निमंत्रण दिया।

भारत की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर, चांसलर मर्ज ने सोमवार को अहमदाबाद के साबरमती आश्रम का दौरा किया और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के नायक की शिक्षाओं की आज पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है।

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप


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