अधिकारियों ने संसदीय समिति से कहा: 78 दिनों के लिए कच्चे तेल का भंडार उपलब्ध
अधिकारियों ने संसदीय समिति से कहा: 78 दिनों के लिए कच्चे तेल का भंडार उपलब्ध
नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने सोमवार को संसद की एक समिति को बताया कि देश में पेट्रोल एवं डीजल की कमी नहीं है तथा इस समय 78 दिनों के लिए कच्चे तेल का भंडार उपलब्ध है।
परिवहन, पर्यटन और संस्कृति से संबंधित संसद की स्थायी समिति में शामिल कई सांसदों ने पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों से देश के कई हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल के लिए लंबी कतारें लगने और राशन की कथित कमी को लेकर सवाल किए।
सूत्रों ने बताया कि जब कई सदस्यों ने मंत्रालय के अधिकारियों से पेट्रोल और एलपीजी की कमी पर सवाल उठाया, तो कुछ विपक्षी सदस्यों ने कहा कि पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने उन्हें कोई आधिकारिक डेटा नहीं दिया।
उन्होंने समिति के सदस्यों को बताया कि देश में अगले 78 दिनों के लिए कच्चे तेल का भंडार है और सरकार ने यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए हैं कि कोई कमी न हो।
उन्होंने कहा, हालांकि युद्ध कब खत्म होगा, इस पर अनिश्चितता बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ विपक्षी सांसदों ने यह भी जानना चाहा कि पश्चिम एशिया युद्ध की समाप्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के बावजूद सुधारात्मक कदम पहले से क्यों नहीं उठाए गए।
कुछ सांसदों ने अधिकारियों से कहा कि उन्हें आम लोगों की पीड़ा को कम करने के लिए पहले से ही योजना बनानी चाहिए थी, जिन्हें तेल और उर्वरक की ऊंची कीमतों का खामियाजा भुगतना पड़ता है।
अधिकारियों ने जनता दल (यू) के सांसद संजय झा की अध्यक्षता वाली इस संसदीय समिति को यह भी बताया कि युद्ध की समाप्ति पर अनिश्चितता के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण पश्चिम एशिया में 37 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं।
समझा जाता है कि समिति के समक्ष उपस्थित हुए उर्वरक मंत्रालय के अधिकारियों ने समिति के सदस्यों को यह भी सूचित किया है कि खरीफ की बुआई से पहले देश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है और सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था की है।
सूत्रों ने कहा कि जब कुछ विपक्षी सदस्यों ने उर्वरकों की उच्च वैश्विक कीमतों का मुद्दा उठाया, तो अधिकारियों ने समिति को सूचित किया कि सरकार ने वैकल्पिक तरीकों से लगभग 80 लाख टन उर्वरक खरीदे हैं।
सूत्रों का कहना है कि फिलहाल 78 लाख टन उर्वरक की मांग है, जिसे पूरा किया जा रहा है।
समिति ने पोत परिवहन, पेट्रोलियम और उर्वरक मंत्रालयों के अधिकारियों के साथ एक बैठक की थी। पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमार ने मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों पर समिति के सदस्यों के सामने एक प्रस्तुति दी।
समझा जाता है कि अधिकारियों ने समिति को यह भी बताया कि पश्चिम एशिया युद्ध के मद्देनजर मालवाहक जहाजों का बीमा प्रीमियम काफी बढ़ गया है।
भाषा हक
हक दिलीप
दिलीप

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