प्रदर्शन का 18वां दिन : कॉजपा ने ‘एक्स’ हैंडल को सक्रिय करने के आदेश की सराहना की

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प्रदर्शन का 18वां दिन : कॉजपा ने ‘एक्स’ हैंडल को सक्रिय करने के आदेश की सराहना की

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  • Publish Date - July 7, 2026 / 10:31 PM IST,
    Updated On - July 7, 2026 / 10:31 PM IST

नयी दिल्ली, सात जुलाई (भाषा) परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार की जवाबदेही की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) का विरोध प्रदर्शन मंगलवार को 18वें दिन में प्रवेश कर गया। वहीं, कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का यह दसवां दिन है।

कॉजपा ने उसके मूल ‘एक्स’ हैंडल पर लगी रोक को हटाने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया।

कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अनशन शुरू करने के बाद से वांगचुक का वजन छह किलोग्राम घट गया है और उनका रक्तचाप भी ‘‘काफी कम’’ बना हुआ है।

दीपके ने कहा, ‘‘यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सोनम वांगचुक जैसे व्यक्ति कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं, फिर भी सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है। यह समझना मुश्किल है कि कोई सरकार इतनी उदासीन कैसे हो सकती है।’’

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कॉजपा के ‘एक्स’ खाते को फिर से सक्रिय करने का आदेश दिया। इस खाते पर मई में रोक लगा दी गई थी।

वांगचुक ने कॉजपा का ‘एक्स’ खाता बहाल करने के लिए न्यायपालिका का आभार व्यक्त किया और उम्मीद जताई कि अब सरकार आंदोलन पर जवाब देगी।

वांगचुक ने कहा, ‘‘हम अदालत के इस फैसले के लिए आभारी हैं। हमें उम्मीद है कि हमारी इस शांतिपूर्ण मुहिम की आवाज अब सरकार तक पहुंचेगी और अहिंसक तरीकों को दंडित करने के बजाय प्रोत्साहित किया जाएगा। अन्यथा लोगों का शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के प्रति विश्वास कमजोर पड़ जाएगा।’’

दीपके ने इसे कॉजपा, आंदोलन, अभिव्यक्ति की आजादी और डिजिटल अधिकारों के लिए ‘‘एक बड़ी जीत’’ बताया। उन्होंने कहा, ‘‘हम ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों तरह से युवाओं की आवाज उठाते रहेंगे।’’

केंद्र सरकार के अदालत में व्यक्त रुख पर सवाल उठाते हुए दीपके ने कहा कि सरकार ने पहले दावा किया था कि कॉजपा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है, लेकिन बाद में अदालत को बताया कि ‘एक्स’ खाते पर इसलिए रोक लगाई गई, क्योंकि उसकी पोस्ट नीट की दोबारा परीक्षा के दौरान छात्रों और अभिभावकों के बीच अशांति पैदा कर सकती थीं।

दीपके ने कहा, ‘‘इस तरह के परस्पर विरोधी बयान हास्यास्पद हैं। यदि हमने कुछ गलत या गैर कानूनी पोस्ट किया होता तो हमारा खाते पर रोक लगाई जा सकती थी। लेकिन हमने केवल युवाओं की आवाज उठाई। बिना किसी पूर्व चेतावनी के हमारे खाते पर रोक लगाना पूरी तरह से अनुचित था।’’

इस बीच, संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल का दौरा किया। किसान संगठन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान के इस्तीफे, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को समाप्त करने, आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और परीक्षा में अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल में हन्नान मोल्ला, पी. कृष्णप्रसाद और अन्य सहित एसकेएम के कई घटक संगठनों के नेता शामिल थे।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी) लिबरेशन से संबद्ध ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के सदस्य- नेहा, मनीष, ऋषिकेश, दीपक कुमार वर्मा और आमीन-ने प्रदर्शन स्थल पर एक अलग मंच पर अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखी।

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप