जिंदा दफन सर्कस कलाकार की मौत; उस्ताद का लालच बना मौत का कारण
जिंदा दफन सर्कस कलाकार की मौत; उस्ताद का लालच बना मौत का कारण
गुरुग्राम(हरियाणा), 31 जुलाई (भाषा) नूंह जिले में एक गड्ढे में तीन दिन तक जिंदा दफन रहने के दौरान दम घुटने से मरने वाले सर्कस कलाकार दीपक के दुखी परिवार का कहना है कि उसकी मौत किसी दुर्घटना का नतीजा नहीं थी, बल्कि उसके उस्ताद के लालच का परिणाम थी।
परिवार का एकमात्र सहारा दीपक की उम्र केवल 27 साल थी। फरीदाबाद के गौंची गांव के रहने वाला दीपक पारंपरिक कलाकारों के परिवार से था, जो एक गांव से दूसरे गांव में घूमते रहते थे। वह लगभग 10 सालों से इस खेल में हिस्सा ले रहा था।
हालांकि उसने कई बार जिंदा दफन होने का करतब दिखाया था जिसके तहत बोरी में बंद करके उसे जिंदा दफनाया जाता था और वह बाद में बाहर निकलता था, लेकिन वह कभी 24 घंटे से अधिक समय तक अंदर नहीं रहा था।
परिवार का कहना था कि दीपक के गुरु सतीश उर्फ पुलसिया ने 7,100 रुपये की पूरी रकम पाने के लिए उसे 72 घंटे तक गड्ढे में बंद रखा था।
दीपक की भाभी सुनीता ने बताया कि हर कार्यक्रम में दर्शकों को यह बताया जाता था कि 7,100 रुपये जमा होने के बाद ही दीपक को बाहर निकाला जाएगा।
हालांकि, यह दावा सिर्फ लोगों को अधिक पैसे देने के लिए प्रोत्साहित करने की एक चाल थी। असल में चाहे कितनी भी रकम जमा हुई हो 24 घंटे पूरे होते ही दीपक को बाहर निकाल लिया जाता था।
सुनीता ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘इस बार 24 घंटे में 7,100 रुपये का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ, इसलिए पुलसिया ने जिंदा रहते हुए दफन रहने की अवधि को बढ़ाकर 72 घंटे कर दिया। जब तय समय के बाद भी दीपक को बाहर न निकालने पर ग्रामीणों ने विरोध किया, तो गड्ढे से मिट्टी हटाई गई। लेकिन तब तक दीपक की मौत हो चुकी थी। दीपक ने कभी भी 72 घंटे तक जमीन में दफन अवस्था में रहने का अभ्यास नहीं किया था।’’
रिश्तेदारों ने बताया कि उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और मांग की है कि मथुरा के लक्ष्मीनगर के रहने वाले पुलसिया के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए।
संपर्क करने पर सदर तावडू पुलिस थाने के प्रभारी राजेश कुमार ने कहा कि उन्हें अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है।
कुमार ने कहा, ‘‘हमने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है और रिपोर्ट के आधार पर कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।’’
दीपक के बड़े भाई मनीष ने बताया कि वह खुद यह करतब सड़क पर दिखाते थे, लेकिन शादी के बाद उन्होंने इसे छोड़ दिया था।
मनीष ने यह भी बताया कि दीपक एक मामले में गिरफ्तारी के बाद लगभग डेढ़ साल जेल में रहा था और जमानत पर रिहा होने के बाद हाल ही में उसने फिर से करतब दिखाना शुरू किया था।
मनीष ने कहा कि जमानत पर बाहर आने के बाद वह 10 से अधिक जगहों पर करतब दिखा चुका था।
दीपक के रिश्तेदारों ने बताया कि वह परिवार का एकमात्र सहारा था। वह अपनी कला का प्रदर्शन करके जो भी पैसे या अनाज कमाता था, उसे अपनी मां बबीता को सौंप देता था।
दीपक की मां बबीता ने कहा, ‘‘दीपक ही मेरी देखभाल करता था, लेकिन बेटे की मौत के बाद मैं पूरी तरह बेसहारा हो गई हूं।’’
जांच के दौरान पता चला कि 23 जुलाई को ‘प्रत्यक्ष समाधि’ का करतब दिखाने से पहले दीपक ने भीड़ का मनोरंजन करने के लिए साइकिल के जरिये कई स्टंट किए थे।
इसके बाद दीपक को एक बोरी में डालकर खास तौर पर खोदे गए गड्ढे में उतारा गया और ऊपर से मिट्टी डाल दी गई। तीन दिन बाद जब उसे बाहर निकाला गया, तो उसमें कोई हलचल नहीं थी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
नूंह के जिला आयुक्त अखिल पिलानी ने पहले कहा था कि ऐसे स्टंट गैर-कानूनी हैं और प्रशासन इस बात की जांच करेगा कि बिना इजाजत के जानलेवा कार्यक्रम कैसे आयोजित किया गया।
भाषा
संतोष नरेश
नरेश

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