नयी दिल्ली, आठ अप्रैल (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक सिंघवी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने संबंधी विपक्ष के नोटिस को खारिज किये जाने को लेकर बुधवार को आरोप लगाया कि यह फैसला संवैधानिक प्रक्रियाओं और लोकतंत्र में जवाबदेही को कमजोर करता है।
विपक्ष के कुछ अन्य नेताओं के साथ संवाददाता सम्मेलन में सिंघवी ने यह भी कहा कि प्रारंभिक चरण में नोटिस को खारिज करने का कदम संविधान में महाभियोग की पूरी प्रणाली का गला घोंटने जैसा है।
संवाददाता सम्मेलन में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता डेरेक ओब्रायन और सागरिका घोष, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के मनोज झा, आम आदमी पार्टी (आप) के संदीप पाठक और कुछ अन्य नेता मौजूद थे।
सिंघवी ने कहा, ‘‘जब जवाबदेही को अवरुद्ध कर दिया जाता है, तो लोकतंत्र पर ही महाभियोग लग जाता है।’’
उन्होंने कहा कि अगर निर्वाचन आयोग का पक्ष मजबूत है, तो जांच का कोई डर नहीं होना चाहिए।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क दिया कि संसद के पीठासीन अधिकारियों ने शुरुआत में ही एक बहु-स्तरीय संवैधानिक प्रक्रिया को एक ही निर्णय में ध्वस्त करके ‘‘मौलिक वैचारिक त्रुटि’’ की है।
उन्होंने कहा कि संविधान एक विस्तृत प्रक्रिया प्रदान करता है जिसमें प्रारंभिक स्वीकृति, न्यायिक समिति का गठन, आरोप तय करना, रिपोर्ट प्रस्तुत करना, संसदीय चर्चा और अंत में निर्णय की बात शामिल है।
सिंघवी ने कहा, ‘‘प्रस्ताव को पहले चरण में ही खारिज करके, आप बाद के सभी चरणों को प्रभावी ढंग से समाप्त कर देते हैं, जिसमें एक स्वतंत्र समिति द्वारा जांच और संसद का सामूहिक विवेक शामिल है।’’
उन्होंने लगाया कि कथित चुनावी अनियमितताओं और न्यायिक निर्देशों के अनुपालन में देरी सहित विपक्ष द्वारा उठाए गए विशिष्ट आरोपों को अस्वीकृति आदेश में पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया गया था।
इस मुद्दे को ‘बहुत गंभीर मामला’ बताते हुए सिंघवी ने कहा कि यह निर्णय ‘‘संसद की गरिमा’’ पर असर डालता है और यह चिंता पैदा करता है कि निर्वाचन आयोग की छानबीन सत्तारूढ़ भाजपा की इच्छा पर निर्भर करता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पूरी प्रक्रिया को एक व्यक्ति के निर्णय तक सीमित कर दिया गया है, जिससे जवाबदेही खत्म हो गई है। संविधान निर्माताओं की मंशा कभी ऐसी नहीं थी।’’
राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को कुमार के खिलाफ विपक्ष के नोटिस को खारिज कर दिया।
विपक्ष ने मार्च में सीईसी के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति को नोटिस सौंपा था।
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